Last Updated: September 22, 2026

Dainik Savera Times Logo

मेरा सौभाग्य है कि मुझे किसानों की सेवा करने का अवसर मिलाः केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan

August 30, 2025

मेरा सौभाग्य है कि मुझे किसानों की सेवा करने का अवसर मिलाः केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan

भोपाल/ नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान शनिवार को अपने संसदीय क्षेत्र विदिशा के दौरे पर थे। विदिशा में शिवराज सिंह ने सबसे पहले बाड़ वाले गणेश मंदिर पहुंचकर दर्शन-पूजन किया और फिर वात्सल्य स्कूल में गणेश जी की आरती में सम्मिलित हुए और छात्र-छात्राओं से संवाद किया। वहीं, शिवराज सिंह ने खेल दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में शिरकत कर युवाओं व स्कूली बच्चों के साथ करीब 2 किलोमीटर साईकिल चलाई। इसके अलावा वे उन्नत कृषि तकनीक संगोष्ठी में शामिल हुए। इस दौरान शिवराज सिंह ने कहा कि हम पर दुनिया के कुछ देश दबाव बना रहे थे कि खेती के लिए पूरा बाजार खोलो, लेकिन आज हम गर्व के साथ कह रहे हैं कि भारत आज ऐसी स्थिति में है कि दुनिया की आँखों में आँख डालकर बात करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने भी कह दिया- राष्ट्र हित सर्वोपरि, किसानों के हितों से समझौता नहीं होगा। इस साल ऐसा उत्पादन किया है कि आज तक इतिहास में नहीं हुआ 3.7 % कृषि की ग्रोथ देकर हमने अन्न के भंडार भर दिए।

किसानों के हित सर्वोपरि
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हम पर टैरिफ लगाकर सोच रहे थे कि भारत की अर्थव्यवस्था में गिरावट आएगी, तूफान मच जाएगा, दुनिया में सबसे ज्यादा केवल 3 महीने में हमारे यहां जीडीपी ग्रोथ हुई है, जिसमें सबसे बड़ा योगदान कृषि का है। उन्होंने कहा कि इस साल ऐसा उत्पादन किया है कि आज तक इतिहास में नहीं हुआ 3.7 % कृषि की ग्रोथ देकर हमने अन्न के भंडार भर दिए है। गेहूं, चावल, मक्का, का रिकॉर्ड उत्पादन हआ है। पहले एक जमाना था जब हम अमेरिका का खराब गेहूं पीएल-480 खाने पर मजबूर थे। लेकिन आज हमारे अन्न के भंडार भरपूर हैं। एक बात कृषि मंत्री के रूप में प्रधानमंत्री जी के आशीर्वाद से कह रहा हूं, भारत सरकार किसानों के साथ डटकर खड़ी है। किसानों के हित सर्वोपरि हैं।

किसानों के पैसे बेकार दवाइयों पर बर्बाद नहीं होंगे
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पहले किसान जब डीएपी या यूरिया जैसी खाद लेने जाते थे तो डीलर जबरन बोतलें थमा देते थे। यह भी पता नहीं चलता था कि, बोतल में असली कीटनाशक है या नकली। बायोस्टिमुलेन्ट के नाम पर हज़ारों दवाइयाँ बाजार में धड़ल्ले से बिक रही थीं, जिनका कोई वैज्ञानिक परीक्षण तक नहीं था। उन्होंने साफ कहा कि, अगर किसान को डीएपी, यूरिया या नैनो चाहिए तो वही मिलेगा, उसके साथ ज़बरदस्ती दूसरी बोतल नहीं दी जाएगी। अगर ऐसा हुआ तो एफआईआर होगी और मैं खुद देखूंगा। किसान की मर्जी के खिलाफ कोई दादागिरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि, बायोस्टिमुलेन्ट के नाम पर लगभग 30 हज़ार दवाइयाँ बेची जा रही थीं, जिनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं था, लेकिन अब सिर्फ वही दवाइयाँ बिकेंगी जो आईसीएआर या कृषि विश्वविद्यालयों में परीक्षण के बाद प्रभावी साबित होंगी। उन्होंने कहा कि, 30 हज़ार में से 22 हज़ार दवाइयाँ तो परीक्षण में आई ही नहीं। 8 हज़ार में से केवल 682 दवाइयाँ ही सही साबित हुईं। बाकी किसी भी हालत में नहीं बिकने दी जाएगी। उन्होंने भी कहा कि, नकली या बेअसर दवाइयों से अगर किसान की फसल बर्बाद होगी तो दोषी कंपनियों का लाइसेंस रद्द होगा और किसानों को मुआवज़ा मिलेगा। चौहान ने कहा कि मोदी सरकार किसानों के साथ खड़ी है और उनके हितों से कोई समझौता नहीं होगा।

हम प्राकृतिक खेती की दिशा में बढ़ रहे
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि खेती को सही मायने में लाभ का धंधा बनाने के लिए दो ही बातें सबसे जरूरी हैं। पहला उत्पादन बढ़ाना और दूसरा उसकी लागत घटाना। उन्होंने कहा कि केवल उत्पादन बढ़ा देने से काम नहीं चलेगा, खेती तभी फायदे का धंधा बनेगी जब उत्पादन बढ़े और साथ ही लागत भी कम हो। शिवराज सिंह चौहान ने प्रगतिशील किसानों के अनुभव साझा करते हुए बताया कि खाद और अन्य संसाधनों की लागत को वैज्ञानिक तरीकों से कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि, किसानों के लिए हमने 6 सूत्रीय रणनीति तैयार की है जिसमें उत्पादन बढ़ाना, लागत घटाना, उत्पादन के उचित दाम देना, नुकसान की भरपाई करना, कृषि का विविधीकरण करना और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना शामिल है। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वज भी खेती में विविधता लाने पर जोर देते थे। जैसे कहा जाता था “चार घूंट पर चार फसल बोई लो” यानी फसल बदलते रहो। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए किसानों को विविधीकरण अपनाना होगा। शिवराज सिंह ने यह भी कहा कि प्राकृतिक खेती की दिशा में आगे बढ़ने के लिए सरकार लगातार जागरूकता कार्यक्रम चला रही है, ताकि किसान कम लागत में अधिक उत्पादन हासिल कर सकें और कृषि वाकई में फायदे का सौदा बन सके।

रबी के लिए विकसित कृषि संकल्प अभियान
कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि देश में करीब 16 हज़ार वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं में रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन किसान तक उसका लाभ नहीं पहुँच पा रहा था। उन्होंने कहा कि, जब तक लैब को लैंड से नहीं जोड़ा जाएगा और वैज्ञानिकों को किसानों से नहीं मिलवाया जाएगा, तब तक कृषि क्षेत्र में अपेक्षित सुधार संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि, इसी सोच के तहत सरकार ने 2170 टीमें बनाकर वैज्ञानिकों को सीधे किसानों के बीच भेजा है। यह पहल आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि आगामी रबी की फसल के लिए भी 3 अक्टूबर, यानी दशहरे के अगले दिन से वैज्ञानिक फिर किसानों के खेतों में पहुंचेंगे और उन्हें नई तकनीकों व उन्नत खेती के उपायों की जानकारी देंगे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यह अभियान किसानों को न सिर्फ नई तकनीक से जोड़ेगा बल्कि उन्हें उत्पादन बढ़ाने और लागत घटाने के व्यावहारिक तरीके भी सिखाएगा।

माता-पिता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है
केंद्रीय कृषि मंत्री ने बच्चों से संवाद करते हुए उन्हें कहानी सुनाई कि देवताओं के बीच यह विवाद हुआ कि सबसे पहले किस देवता की पूजा की जानी चाहिए। सभी देवताओं को लगा कि उनमें विशेष गुण हैं, इसलिए प्रथम पूज्य वही होने चाहिए। इस विवाद के समाधान के लिए यह तय हुआ कि जो देवता सबसे पहले पृथ्वी की परिक्रमा पूरी करेगा, वही प्रथम पूज्य कहलाएगा। सभी देवता अपने-अपने वाहनों पर सवार होकर पृथ्वी की परिक्रमा करने निकल पड़े। भगवान शिव और माता पार्वती वहीं विराजमान थे। इस बीच गणेश जी अपने वाहन मूषक पर सवार होकर जाने के बजाय शांत बैठे रहे। गणेश जी उठे और माता पार्वती और भगवान शिव की परिक्रमा की, उन्हें प्रणाम कर कहा माता-पिता ही सम्पूर्ण सृष्टि हैं। उनकी परिक्रमा करना ही सम्पूर्ण धरती की परिक्रमा है। जब अन्य देवता देर बाद लौटे और दावा किया कि उन्होंने सबसे पहले पृथ्वी की परिक्रमा की है, तब गणेश जी ने यह तर्क दिया। अंततः यह स्वीकार किया गया कि माता-पिता की सेवा और पूजा ही सबसे बड़ा धर्म है। इस प्रकार गणेश जी प्रथम पूज्य देवता बने।

स्वदेशी अपनाने का आह्वान
शिवराज सिंह ने आह्वान करते हुए कहा कि अपने रोज़मर्रा के इस्तेमाल की हर चीज़, चाहे वह पहनने की हो, खाने-पीने की हो या फिर तेल, साबुन जैसी दैनिक ज़रूरत की वस्तुएं हों, वो केवल देश में बनी वस्तुएं ही खरीदें। उन्होंने कहा कि विदेशी उत्पाद खरीदने से देश का धन बाहर चला जाता है, जबकि देशी सामान खरीदने से अपने ही लोगों को रोज़गार और व्यापार का सहारा मिलता है। तो अपने देश का पैसा हम क्यों विदेश में भेजें।

खबरें और भी हैं...

Copyright © 2025 Dainik Savera Times. All rights reserved.
ऐप खोलें