नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और स्विस राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन के बीच वार्ता के बाद, भारत और स्विट्जरलैंड ने सोमवार को आव्रजन और आवाजाही साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए। साथ ही, उन्होंने भारतीय निर्यात के लिए स्विस बाजार तक पहुंच बढ़ाने और परमाणु ऊर्जा व रक्षा क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने पर भी सहमति जताई। पार्मेलिन सोमवार सुबह 3 दिवसीय राजकीय यात्रा पर नई दिल्ली पहुंचे, जो उनकी इस देश की पहली आधिकारिक यात्रा है।
हालांकि, इस वर्ष वह दूसरी बार भारत आए हैं। वह इससे पहले फरवरी में आयोजित ‘एआई इंपैक्ट शिखर सम्मेलन’ में हिस्सा लेने पहुंचे थे। अपने मीडिया बयान में मोदी ने कहा कि स्विट्जरलैंड में भारतीय निर्यात के लिए बाजार तक पहुंच बढ़ाने और दोनों देशों के बीच निवेश को और आसान बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। स्विट्जरलैंड यूरोप में भारत का एक प्रमुख आर्थिक साझेदार है।
वर्तमान में इंजीनियरिंग, सेवा, रसायन और दवा जैसे क्षेत्रों में 330 से अधिक स्विस कंपनियां भारत में काम कर रही हैं, जबकि स्विट्जरलैंड में सूचना प्रौद्योगिकी, दवा और मशीनरी जैसे सेक्टरों में भारतीय कंपनियां मौजूद हैं। भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के देशों-आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड-के बीच ‘व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता’ (टीईपीए) के अक्टूबर में लागू होने से दोनों पक्षों के बीच व्यापार और निवेश के रिश्तों को और बढ़ावा मिला है।
मोदी ने कहा कि टीईपीए निवेश, नवाचार, रोजगार और साझा समृद्धि के लिए एक महत्वाकांक्षी खाका है। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से, हम अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब अमरीकी डॉलर के निवेश और 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार के अपने लक्ष्यों को साकार करेंगे। प्रधानमंत्री ने नवाचार, बुनियादी ढांचे और उन्नत प्रौद्योगिकी को भारत-स्विट्जरलैंड साझेदारी के मजबूत स्तंभ बताते कहा कि दोनों पक्ष सहभागिता को ‘नई गति’ देने जा रहे हैं।पुलिस ने चलाया स्पैशल CASO ऑपरेशन
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