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Passport Ranking में इतने नंबर पर पहुंचा भारत, इन अमीर देशों को छोड़ा पीछे, देखें लिस्ट

Passport rules

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नई दिल्ली: दुनिया में किसी देश के नागरिकों की वैश्विक पहुंच काफी हद तक उसके पासपोर्ट की ताकत पर निर्भर करती है। कौन-सा नागरिक कितने देशों में बिना वीजा के जा सकता है, इसी आधार पर हर साल हेनली पासपोर्ट इंडेक्स वैश्विक रैंकिंग जारी करता है। 2026 की ताजा रिपोर्ट में भारतीय पासपोर्ट ने उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है, जबकि कई विकसित और अमीर देशों की स्थिति कमजोर हुई है।

भारत ने लगाई लंबी छलांग

हेनली पासपोर्ट इंडेक्स 2026 के अनुसार भारत अब 75वें स्थान पर पहुंच गया है। पिछले वर्ष भारत की रैंकिंग 85वीं थी, यानी इस बार भारतीय पासपोर्ट ने 10 स्थानों की छलांग लगाई है। भारतीय नागरिक अब 56 देशों में वीजा-फ्री या आसान एंट्री के साथ यात्रा कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की रैंकिंग में सुधार के पीछे कई देशों के साथ हुए नए द्विपक्षीय समझौते और बेहतर कूटनीतिक संबंध अहम कारण हैं।

पाकिस्तान की स्थिति अब भी कमजोर

रिपोर्ट में पाकिस्तान की रैंकिंग में भी मामूली सुधार दर्ज हुआ है। पाकिस्तान 103वें स्थान से बढ़कर 98वें स्थान पर पहुंचा है। हालांकि पाकिस्तान के नागरिक केवल 31 देशों में वीजा-फ्री यात्रा कर सकते हैं। कमजोर पासपोर्ट वाले देशों की सूची में पाकिस्तान अब भी यमन, इराक और अफगानिस्तान जैसे देशों के साथ शामिल है।

सिंगापुर बना दुनिया का सबसे ताकतवर पासपोर्ट

2026 की रैंकिंग में सिंगापुर का पासपोर्ट दुनिया में सबसे मजबूत माना गया है। सिंगापुर के नागरिक 192 देशों में बिना वीजा यात्रा कर सकते हैं। इसके बाद जापान, दक्षिण कोरिया और संयुक्त अरब अमीरात संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर हैं, जहां के नागरिक 187 देशों तक वीजा-फ्री पहुंच रखते हैं।

यूरोप और एशिया के देशों का दबदबा

रैंकिंग में नॉर्वे और स्विट्जरलैंड जैसे यूरोपीय देशों ने भी मजबूत स्थिति बनाए रखी है। वहीं यूरोपीय संघ के कई देशों के पासपोर्ट वैश्विक स्तर पर शीर्ष श्रेणी में शामिल हैं। मलेशिया और यूनाइटेड किंगडम भी टॉप देशों की सूची में बने हुए हैं।

अमेरिका और ब्रिटेन की रैंकिंग में गिरावट

एक समय दुनिया का सबसे ताकतवर पासपोर्ट रखने वाला अमेरिका अब 10वें स्थान पर पहुंच गया है। विशेषज्ञ इसके पीछे सख्त वीजा नीतियों और कम अंतरराष्ट्रीय समझौतों को कारण मान रहे हैं। ब्रिटेन भी पहले की तुलना में नीचे आया है और अब शीर्ष तीन देशों से बाहर हो चुका है। कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों की रैंकिंग में भी गिरावट दर्ज की गई है। माना जा रहा है कि सुरक्षा और प्रवासन नियंत्रण को लेकर सख्त नियमों का असर इन देशों की पासपोर्ट ताकत पर पड़ा है।

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दुनिया के सबसे कमजोर पासपोर्ट

रिपोर्ट के मुताबिक अफगानिस्तान, सीरिया, इराक, यमन और सोमालिया जैसे देशों के पासपोर्ट सबसे कमजोर श्रेणी में शामिल हैं। इन देशों के नागरिकों को सीमित देशों में ही वीजा-फ्री यात्रा की सुविधा मिलती है। हेनली पासपोर्ट इंडेक्स को वैश्विक यात्रा स्वतंत्रता का एक महत्वपूर्ण पैमाना माना जाता है, जो किसी देश की कूटनीतिक और आर्थिक स्थिति को भी दर्शाता है।

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