Last Updated: September 27, 2026

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भारतीय सेना होगी और ताकतवर, अमेरिका से मिलेंगे ये खतरनाक हथियार

November 20, 2025

भारतीय सेना होगी और ताकतवर, अमेरिका से मिलेंगे ये खतरनाक हथियार

नेशनल डेस्क: भारत की सैन्य ताकत को और अधिक मजबूत करने की दिशा में अमेरिका ने एक बड़ा फैसला लिया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने भारत को एडवांस FGM-148 जेवलिन एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम और M982A1 एक्सकैलिबर प्रिसिजन-गाइडेड आर्टिलरी प्रोजेक्टाइल बेचने की अनुमति दे दी है। यह डील करीब 47.1 मिलियन अमेरिकी डॉलर की बताई जा रही है।

पूरे सौदे में क्या है?

डिफेंस सिक्योरिटी कोऑपरेशन एजेंसी (DSCA) ने जानकारी दी कि इस पैकेज में भारत को कई आधुनिक हथियार मिलेंगे, जिनमें 100 FGM-148 जेवलिन मिसाइलें, 1 जेवलिन फ्लाई-टू-बाय मिसाइल (टेस्ट फायरिंग के लिए), 25 लाइटवेट कमांड लॉन्च यूनिट (CLU), 216 एक्सकैलिबर प्रिसिजन आर्टिलरी राउंड्स, ट्रेनिंग एड्स, सिम्युलेटर, स्पेयर पार्ट्स और पूरी लाइफसाइकल सपोर्ट शामिल हैं। इस पूरे पैकेज का कुल अनुमानित मूल्य 93 मिलियन अमेरिकी डॉलर है।

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DSCA ने क्या कहा?

अमेरिकी एजेंसी DSCA ने बताया कि भारत ने आधिकारिक रूप से इन हथियारों की मांग की थी और विदेश विभाग ने इन्हें मंजूरी दे दी है। अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि भारत इन हथियारों को अपनी सेना में आसानी से शामिल कर सकेगा। इससे क्षेत्रीय सैन्य संतुलन पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। यह मंजूरी अब अमेरिकी कांग्रेस के पास भेजी गई है, जहां से अंतिम हरी झंडी मिलने के बाद सप्लाई शुरू होगी।

क्या है जेवलिन मिसाइल सिस्टम?

जेवलिन मिसाइल दुनिया की सबसे उन्नत पोर्टेबल एंटी-टैंक मिसाइलों में से एक है। इसे अमेरिकी कंपनियों लॉकहीड मार्टिन और RTX (रेथियॉन टेक्नोलॉजीज) ने मिलकर बनाया है। इसे ‘फायर एंड फॉरगेट मिसाइल’ कहा जाता है यानी मिसाइल छोड़ने के बाद सैनिक को लक्ष्य पर नजर बनाए नहीं रखना पड़ता। मिसाइल खुद लक्ष्य को पहचानकर उस पर सटीक हमले की क्षमता रखती है। इसका टॉप-अटैक मोड टैंक या बख्तरबंद गाड़ियों की छत को निशाना बनाता है, जो सबसे कमजोर हिस्सा माना जाता है।

एक्सकैलिबर प्रोजेक्टाइल क्या है?

यह एक प्रिसिजन-गाइडेड आर्टिलरी राउंड है, जिसे GPS गाइडेंस से चलाया जाता है। यह 40–50 किलोमीटर तक बेहद सटीक तरीके से निशाना साध सकता है। दुश्मन के छिपे हुए या दूर मौजूद महत्वपूर्ण ठिकानों को नष्ट करने के लिए इसे खासतौर पर उपयोग किया जाता है। सेना को अत्याधुनिक टैंक-विरोधी और लंबी दूरी की प्रिसिजन फायरिंग क्षमता मिलेगी। सीमा पर खड़ी टैंक-थ्रेट या बख्तरबंद वाहनों के खिलाफ मजबूत जवाब मिलेगा। आर्टिलरी यूनिट्स की मारक क्षमता और सटीकता कई गुना बढ़ेगी। अमेरिका की यह मंजूरी भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी को और मजबूत बनाती है और भारतीय सेना के आधुनिकीकरण में बड़ा कदम मानी जा रही है।

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