नेशनल डेस्क: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक बार फिर अंतरिक्ष की दुनिया में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। बुधवार सुबह 8 बजकर 54 मिनट पर इसरो ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से एक महत्वपूर्ण वाणिज्यिक मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। इस मिशन के तहत एलवीएम3-एम6 रॉकेट के जरिए ‘ब्लूबर्ड ब्लॉक-2’ संचार उपग्रह को अंतरिक्ष में भेजा गया।
यह मिशन अमेरिका की कंपनी एएसटी स्पेसमोबाइल और इसरो की वाणिज्यिक इकाई न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) के बीच हुए समझौते के तहत संचालित किया जा रहा है। इस लॉन्चिंग के साथ इसरो ने पृथ्वी की निम्न कक्षा (LEO) में अब तक का सबसे भारी पेलोड स्थापित करने का रिकॉर्ड बनाया है।
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इस संचार उपग्रह का वजन करीब 6,100 किलोग्राम है, जो एलवीएम3 रॉकेट के इतिहास में सबसे भारी पेलोड माना जा रहा है। इससे पहले यह रिकॉर्ड एलवीएम3-एम5 मिशन के नाम था, जिसमें करीब 4,400 किलोग्राम वजनी संचार उपग्रह को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया था। इसरो के मुताबिक, ‘ब्लूबर्ड ब्लॉक-2’ उपग्रह को पृथ्वी से लगभग 600 किलोमीटर की ऊंचाई पर तैनात किया जाएगा। लॉन्च के करीब 15 मिनट बाद उपग्रह के रॉकेट से अलग होने की प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है। इस ऐतिहासिक मिशन की लॉन्चिंग से पहले इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने 23 दिसंबर को तिरुमला स्थित श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में पूजा-अर्चना भी की थी।
#WATCH | Sriharikota, Andhra Pradesh | ISRO’s LVM3 M6 mission lifts off from the Satish Dhawan Space Centre, carrying the BlueBird Block-2 satellite into orbit, as part of a commercial deal with U.S.-based AST SpaceMobile.
The mission will deploy the next-generation… pic.twitter.com/VceVBLOU5n
— ANI (@ANI) December 24, 2025
एलवीएम3-एम6 रॉकेट की ऊंचाई लगभग 43.5 मीटर है और यह तीन चरणों वाला प्रक्षेपण यान है। इसमें शक्तिशाली क्रायोजेनिक इंजन लगाया गया है, जिसे इसरो के लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर द्वारा विकसित किया गया है। भारी थ्रस्ट देने के लिए इसमें दो एस200 ठोस रॉकेट बूस्टर लगाए गए हैं, जिन्हें विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र ने तैयार किया है।
‘ब्लूबर्ड ब्लॉक-2’ मिशन का मुख्य उद्देश्य उपग्रह के जरिए सीधे स्मार्टफोन तक मोबाइल नेटवर्क सेवा उपलब्ध कराना है। यह तकनीक दुनिया के किसी भी कोने में बिना टावर के 4जी और 5जी वॉयस कॉल, वीडियो कॉल, मैसेजिंग, इंटरनेट स्ट्रीमिंग और डेटा सेवाएं प्रदान करने में सक्षम होगी। इससे दूर-दराज और नेटवर्क से वंचित इलाकों में मोबाइल कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। एएसटी स्पेसमोबाइल इससे पहले सितंबर 2024 में ब्लूबर्ड-1 से ब्लूबर्ड-5 तक पांच उपग्रह लॉन्च कर चुकी है, जो अमेरिका समेत कई देशों में निरंतर इंटरनेट कवरेज दे रहे हैं।
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कंपनी आने वाले समय में और भी उपग्रह लॉन्च करने की योजना बना रही है और दुनिया भर के 50 से अधिक मोबाइल नेटवर्क ऑपरेटरों के साथ साझेदारी कर चुकी है। इस मिशन के साथ इसरो ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भारत न सिर्फ अंतरिक्ष अनुसंधान में, बल्कि वैश्विक वाणिज्यिक स्पेस मार्केट में भी एक मजबूत और भरोसेमंद साझेदार बन चुका है।
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