श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश) : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शुक्रवार को इतिहास रचते हुए भू-तुल्यकालिक कक्षा में स्थापित होने वाले देश के पहले ‘इमेजिंग’ उपग्रह का सफल प्रक्षेपण किया और भू-तुल्यकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान (जीएसएलवी) के जरिए 2,300 किलोग्राम से अधिक वजनी उपग्रह को निर्धारित कक्षा में स्थापित कराया। उपग्रह को, मिशन से जुड़े एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने ‘आसमान से नजर रखने वाली आंख’ करार दिया और यह उपग्रह वास्तविक समय में तस्वीरें उपलब्ध कराएगा, साथ ही कृषि एवं आपदा प्रबंधन समेत कई क्षेत्रों में देश की मदद करेगा।
इसरो ने बताया कि उपग्रह ईओएस-05 यहां से प्रक्षेपित होने के करीब 18 मिनट बाद निर्धारित उप-भूतुल्यकालिक अंतरण कक्षा में सफलतापूर्वक पहुंच गया। अंतरिक्ष एजैंसी ने उन अटकलों को खारिज किया कि ईओएस-05 एक ‘टोही उपग्रह’ है।
जहां कई पृथ्वी अवलोकन उपग्रह पृथ्वी की निचली कक्षा (एलईओ) में संचालित होते हैं, वहीं ईओएस-05 करीब 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर भू-तूल्यकालिक कक्षा में स्थापित होगा। जहां वह पृथ्वी की घूर्णन गति के साथ तालमेल बैठाएगा। जीएसएलवी द्वारा ले जाया गया 2,300 किलोग्राम से अधिक वजन वाला यह उपग्रह अब तक इस यान से भेजा गया सबसे भारी उपग्रह है।
सरो प्रमुख वी. नारायणन ने सफल प्रक्षेपण की घोषणा करते हुए कहा, मुझे यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि जीएसएलवी एफ-17 यान ने उन्नत ईओएस-05 जियो-इमेजिंग उपग्रह को सफलतापूर्वक और सटीक तरीके से निर्धारित कक्षा में स्थापित कर दिया है। मिशन निदेशक थॉमस कुरियन ने कहा कि इस मिशन में विशेष रूप से तैयार किया गया ईओएस उपग्रह भेजा गया है, जो लगभग वास्तविक समय में तस्वीरें लेने में सक्षम है।

