-
बिजनेस डेस्क- नई दिल्ली नीतिगत सुधारों, निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी और अंतरिक्ष आधारित सेवाओं की बढ़ती मांग के कारण भारत की स्पेस इकोनॉमी 2033 तक बढ़कर 4.22 लाख करोड़ रुपए (44 अरब डॉलर) तक पहुंच सकती है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई। ईवाई और भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की संयुक्त रिपोर्ट के.