Last Updated: September 21, 2026

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ISRO का साल का पहला प्रक्षेपण, PSLV-C62 से ‘अन्वेषा’ समेत 15 उपग्रह लॉन्च

January 12, 2026

ISRO का साल का पहला प्रक्षेपण, PSLV-C62 से ‘अन्वेषा’ समेत 15 उपग्रह लॉन्च

नेशनल डेस्क: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने आज साल 2026 का पहला अंतरिक्ष मिशन सफलतापूर्वक लॉन्च किया। श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से 260 टन वजनी PSLV-C62 रॉकेट के जरिए पृथ्वी अवलोकन उपग्रह ‘अन्वेषा’ सहित कुल 15 उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजा गया। इन सभी उपग्रहों को तय कक्षा में स्थापित किया जाएगा। यह मिशन भारत के लिए रणनीतिक और तकनीकी दोनों ही दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।

‘अन्वेषा’ से मजबूत होगी देश की निगरानी क्षमता

इस मिशन का मुख्य उपग्रह EOS-N1 है, जिसे ‘अन्वेषा’ नाम दिया गया है। इसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने विकसित किया है। ‘अन्वेषा’ को धरती से लगभग 600 किलोमीटर ऊपर सन-सिंक्रोनस पोलर ऑर्बिट में स्थापित किया जाएगा। यह उपग्रह पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए बेहद साफ और विस्तृत तस्वीरें लेने में सक्षम है। इसमें अत्याधुनिक हाइपरस्पेक्ट्रल सेंसर लगाए गए हैं, जो सामान्य कैमरों की तुलना में कहीं ज्यादा सटीक जानकारी जुटाते हैं। इसी वजह से ‘अन्वेषा’ को भारत का अंतरिक्ष में लगाया गया सीसीटीवी भी कहा जा रहा है।

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आतंकियों और घुसपैठियों पर रखेगा पैनी नजर

‘अन्वेषा’ की मदद से सीमाओं पर होने वाली गतिविधियों, घुसपैठ, आतंकी ठिकानों और संदिग्ध हलचलों पर नजर रखी जा सकेगी। यह उपग्रह जंगलों, पहाड़ी इलाकों और बंकरों में छिपे दुश्मनों की गतिविधियों की तस्वीरें भी लेने में सक्षम है। इससे सेना और सुरक्षा एजेंसियों को समय रहते सटीक जानकारी मिल सकेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपग्रह देश की सुरक्षा तैयारियों को नई मजबूती देगा और दुश्मनों की हर हरकत पर निगरानी आसान हो जाएगी।

PSLV-डीएल वेरिएंट का इस्तेमाल

इस मिशन में PSLV के डीएल वेरिएंट का उपयोग किया गया है, जिसमें दो सॉलिड स्ट्रैप-ऑन मोटर लगे होते हैं। यह PSLV रॉकेट की 64वीं उड़ान है। PSLV इसरो का भरोसेमंद लॉन्च व्हीकल रहा है, जिसने अब तक कई बड़े और ऐतिहासिक मिशनों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है।

PSLV का शानदार रिकॉर्ड

PSLV रॉकेट चंद्रयान-1, मार्स ऑर्बिटर मिशन, आदित्य-L1 और एस्ट्रोसैट जैसे अहम अभियानों को अंतरिक्ष में पहुंचा चुका है। साल 2017 में इसरो ने इसी रॉकेट से एक साथ 104 उपग्रह लॉन्च कर विश्व रिकॉर्ड भी बनाया था।

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छोटे उपग्रह लॉन्च बाजार में भारत की मजबूत पकड़

PSLV-C62 मिशन के जरिए 15 उपग्रहों को सन-सिंक्रोनस पोलर ऑर्बिट में स्थापित किया जा रहा है। यह मिशन वैश्विक स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च बाजार में भारत की बढ़ती भूमिका और तकनीकी क्षमता को दर्शाता है।

सैन्य के साथ-साथ नागरिक उपयोग भी संभव

‘अन्वेषा’ सिर्फ सुरक्षा के लिहाज से ही नहीं, बल्कि कृषि, पर्यावरण निगरानी, भूमि उपयोग, खनिज संसाधनों की पहचान और शहरी विकास के अध्ययन में भी मददगार साबित होगा। इसमें लगी हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग तकनीक हर पिक्सल में सैकड़ों लाइट बैंड रिकॉर्ड कर सकती है, जिससे धरती से जुड़ी बेहद बारीक जानकारी मिल सकेगी। यह मिशन भारत की अंतरिक्ष शक्ति और रक्षा क्षमता दोनों को नई ऊंचाई देने वाला माना जा रहा है।

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