नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी तबीयत और डॉक्टरों की सलाह को ध्यान में रखते हुए उन्होंने यह कदम उठाया है। उनका इस्तीफा तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को एक पत्र लिखकर अपना इस्तीफा सौंपा। पत्र में उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 67(a) का हवाला दिया और कहा कि स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता देते हुए और डॉक्टरों की सलाह मानते हुए वह पद छोड़ रहे हैं। जानकारी दें कि उप राष्ट्रपति का कार्यकाल 2027 तक था।
अपने पत्र में जगदीप धनखड़ ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के साथ उनका सहयोग और सौहार्दपूर्ण संबंध हमेशा यादगार रहेंगे। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मंत्रिपरिषद के सदस्यों का भी आभार जताया कि उन्होंने उनके कार्यकाल के दौरान उनका मार्गदर्शन और सहयोग किया।

धनखड़ ने अपने पत्र में लिखा कि उपराष्ट्रपति रहते हुए उन्होंने भारत की शानदार आर्थिक प्रगति और अभूतपूर्व विकास को देखा। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक बदलाव के दौर में देश की सेवा करना उनके लिए बहुत गर्व और संतोष की बात रही।
कुछ महीने पहले, 9 मार्च 2025 को, उन्हें सीने में दर्द और बेचैनी महसूस हुई थी। इसके बाद उन्हें दिल्ली के एम्स (AIIMS) अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां उन्हें कार्डियक केयर यूनिट (CCU) में रखा गया था। उनकी हालत स्थिर होने के बाद 12 मार्च को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी।
जगदीप धनखड़ का राजनीतिक और कानूनी जीवन बहुत लंबा रहा है। उपराष्ट्रपति बनने से पहले वह पश्चिम बंगाल के राज्यपाल भी रह चुके हैं। उन्हें 30 जुलाई 2019 को पश्चिम बंगाल का 29वां राज्यपाल नियुक्त किया गया था। इसके अलावा वह राजस्थान से सांसद और विधायक रह चुके हैं और एक जाने-माने वकील भी रहे हैं।
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