महाराष्ट्र: नागपुर में E20 (20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल के विरोध में सोमवार को भारतीय यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के नागपुर स्थित आवास का घेराव करने के लिए मार्च कर रहे थे। हालांकि, पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक लिया और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।
इस प्रदर्शन का नेतृत्व यूथ कांग्रेस के स्थानीय नेता मेहुल आडवाणी ने किया। उन्होंने कहा कि E20 पेट्रोल को लोगों पर जबरन नहीं थोपा जाना चाहिए। उनका कहना है कि जब तक सरकार इस फैसले पर दोबारा विचार नहीं करती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
प्रदर्शनकारियों की क्या मांग है?
यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई का कहना है कि E20 पेट्रोल से कई वाहनों के इंजन पर असर पड़ रहा है और माइलेज भी कम हो रहा है। उनका दावा है कि खासतौर पर पुराने वाहनों के लिए यह ईंधन नुकसानदायक साबित हो सकता है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि पेट्रोल पंपों पर E20 के साथ-साथ बिना इथेनॉल वाला सामान्य पेट्रोल भी उपलब्ध कराया जाए, ताकि वाहन मालिक अपनी जरूरत के अनुसार ईंधन चुन सकें।
सरकार का क्या कहना है?
केंद्र सरकार और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने E20 नीति का समर्थन किया है। सरकार का कहना है कि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने से देश का कच्चे तेल का आयात कम होगा, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी। इसके अलावा, इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और गन्ना सहित अन्य फसलों से इथेनॉल बनाने वाले किसानों को आर्थिक लाभ मिलेगा। पेट्रोलियम मंत्रालय ने E20 को लेकर सोशल मीडिया पर किए जा रहे कई दावों को भ्रामक और गैर-वैज्ञानिक बताया है। मंत्रालय का कहना है कि सरकार ने इस नीति को वैज्ञानिक परीक्षणों और तय मानकों के आधार पर लागू किया है।
सोशल मीडिया पर भी कार्रवाई
E20 को लेकर चल रही बहस के बीच नागपुर साइबर पुलिस ने सोशल मीडिया पर कथित रूप से भ्रामक जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू की है। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत कई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस का आरोप है कि ये लोग E20 नीति को लेकर गलत जानकारी फैलाकर लोगों को भ्रमित कर रहे थे और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को निशाना बना रहे थे।
फिलहाल E20 पेट्रोल को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच बहस तेज हो गई है। जहां सरकार इसे पर्यावरण, किसानों और देश की अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद बता रही है, वहीं विपक्ष उपभोक्ताओं को सामान्य पेट्रोल का विकल्प देने की मांग कर रहा है।

