Last Updated: September 22, 2026

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मराठा आरक्षण आंदोलन: महाराष्ट्र के तीन जिलों में इंटरनेट सेवाएं निलंबित

February 26, 2024

मराठा आरक्षण आंदोलन: महाराष्ट्र के तीन जिलों में इंटरनेट सेवाएं निलंबित

मुंबई। मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की मांग को लेकर कार्यकर्ता मनोज जरांगे के नेतृत्व में जारी आंदोलन के मद्देनजर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए महाराष्ट्र के जालना, छत्रपति संभाजीनगर और बीड जिलों में सोमवार को इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गईं। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि इन जिलों की सीमाएं भी एहतियातन सील कर दी गई हैं। एक अधिकारी ने राज्य गृह विभाग के एक आदेश का हवाला देते हुए कहा कि सोशल मीडिया मंचों पर अफवाहों के प्रसार के मद्देनजर किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए तीन जिलों में इंटरनेट सेवाएं सुबह छह बजे से शाम चार बजे तक निलंबित कर दी गई हैं। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि बीड जिले में बिना अनुमति के प्रदर्शन करने के आरोप में तीन मामले दर्ज किए गए हैं और राज्य परिवहन की एक बस को नुकसान पहुंचाने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

इससे पहले, जरांगे द्वारा मराठा आरक्षण के लिए चलाए जा रहे आंदोलन को देखते हुए कानून-व्यवस्था की स्थिति के मद्देनजर महाराष्ट्र के जालना जिले के अंबड तालुका में कफ्यरू लगा दिया गया है। जालना के जिलाधिकारी श्रीकृष्ण पांचाल ने आदेश में कहा कि जरांगे ने रविवार को घोषणा की कि वह मुंबई जाएंगे और मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की अपनी मांग को लेकर आंदोलन करेंगे। इसमें कहा गया है कि ऐसी आशंका है कि लोग उन्हें (मुंबई जाने से) रोकने के लिए जालना के अंतरवाली सरती गांव में आ सकते हैं, जहां कार्यकर्ता भूख हड़ताल कर रहे हैं। आदेश में कहा गया है कि भारी भीड़ के कारण धुले-मुंबई राजमार्ग और आसपास के अन्य इलाकों पर यातायात प्रभावित होने की आशंका है। आदेश में कहा गया है कि इससे शांति और कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है इसलिए जिलाधिकारी द्वारा अंबड तालुका में सीआरपीसी की धारा 144 (2) के तहत सोमवार आधी रात से अगले आदेश तक कफ्यरू लगा दिया गया है।

महाराष्ट्र विधानमंडल ने पिछले मंगलवार को एक दिवसीय विशेष सत्र के दौरान एक अलग श्रेणी के तहत शिक्षा और सरकारी नौकरियों में मराठों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने वाला विधेयक सर्वसम्मति से पारित किया था लेकिन जरांगे अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत समुदाय के लिए आरक्षण और कुनबी मराठों के ‘सगे संबंधियों’ के लिये अधिसूचना को कानून में बदलने की अपनी मांग पर अड़े हुए हैं।

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