Markanda river’s water level is low : कुरुक्षेत्र। शाहाबाद मारकंडा दरिया का जलस्तर तेजी से घटने से शाहाबाद क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांवों को बड़ी राहत मिली है। शनिवार को बाढ़ जैसे हालात झेलने वाले कठवा, तंगौर और कलसाना सहित कई गांवों में रविवार को पानी उतरने लगा, जिससे लोगों ने राहत की सांस ली।
लोगों का आवागमन अब सामान्य
अब मारकंडा में केवल 561 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया है, जबकि मुलाना में 7800 क्यूसेक और कालाअंब में 1032 क्यूसेक जल प्रवाह रिकॉर्ड हुआ। जलस्तर कम होने के साथ ही गांव कलसाना की आबादी और कठवा के मुख्य मार्ग से पानी उतर गया है, जिससे लोगों का आवागमन सामान्य होने लगा है। हालांकि खेतों में फैला पानी अब भी किसानों की चिंता का कारण बना हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार गांव तंगौर, कठवा, कलसाना, मुगलमाजरा और मदुदां की करीब 2500 से 3000 एकड़ कृषि भूमि में लगी धान बाढ़ की चपेट में आ गई, जिसमें आधे से अधिक फसल पूरी तरह नष्ट हो चुकी है।
कई जगह मुख्य रास्ता ही डूबा
कठवा का मुख्य रास्ता पानी में डूब चूका था जिस कारण प्रशासन की और से रास्ता बंद का बोर्ड लगा दिया गया था। लेकिन अब पानी उतरने के बाद इस रास्ते से ग्रामीणों की आवाजाही शुरू हो गयी है। तंगौर के सरपंच सचिन कुमार, कठवा के पूर्व सरपंच अमरिंदर सिंह तथा अन्य ग्रामीणों ने कहा कि पिछले चार वर्षों से लगातार मारकंडा का पानी उनकी फसलों को बर्बाद कर रहा है। पिछले वर्ष भी मुख्यमंत्री सहित सत्ता और विपक्ष के कई बड़े नेता प्रभावित गांवों का दौरा कर चुके थे और स्थायी समाधान का भरोसा दिया गया था, पर आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
हर साल होता है लाखों का नुकसान
ग्रामीणों का कहना है कि यदि अब भी स्थायी समाधान नहीं किया गया तो वे इस मुद्दे पर बड़ा निर्णय लेने को मजबूर होंगे। हर वर्ष उन्हें लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है, जबकि प्रशासनिक स्तर पर केवल अस्थायी इंतजाम किए जाते हैं। भले ही फिलहाल मारकंडा का जलस्तर काफी नीचे आ गया है, लेकिन ग्रामीणों में डर अभी भी बरकरार है। उनका कहना है कि अगर पहाड़ी क्षेत्रों में दोबारा तेज बारिश होती है तो दरिया फिर उफान पर आ सकता है और हालात दोबारा बिगड़ सकते हैं।
लोगों को लेनी पड़ी मंदिर में शरण
मारकंडा दरिया का पानी शाहाबाद स्थित बाजीगर कॉलोनी के निचले हिस्से तक भी पहुंच गया था। पानी घरों में घुसने के कारण दो-तीन परिवारों को अस्थायी रूप से मारकंडा मंदिर में शरण लेनी पड़ी। हालांकि जलस्तर कम होने के बाद सभी परिवार वापस अपने घर लौट आए हैं और अब नुकसान का आकलन कर रहे हैं। बाढ़ का पानी कम होने के बावजूद प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। प्रभावित गांवों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है तथा चिकित्सा और राहत संबंधी व्यवस्थाएं बनाए रखी गई हैं। प्रशासन का कहना है कि अगर दोबारा जलस्तर बढ़ता है तो तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किए जाएंगे।
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