Last Updated: October 3, 2026

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Mother’s Day Special : वृद्धाश्रम में मां आज भी दे रहीं दुआएं, हमेशा खुश रहें मेरे ‘लाल’

May 10, 2026

Mother’s Day Special : वृद्धाश्रम में मां आज भी दे रहीं दुआएं, हमेशा खुश रहें मेरे ‘लाल’

करनाल। जीवन की संध्या में भी मां का आशीर्वाद नहीं बदलता। वृद्धाश्रम की चौखट पर बैठी मां आज भी अपने बच्चों की खुशियों के लिए दुआएं मांग रही है। आंखों में इंतजार है, लेकिन दिल में शिकायत नहीं। अपनों से दूर होकर भी मां की ममता यही कहती है — बच्चे जहां रहें, हमेशा खुश रहें।

सोशल मीडिया रौशन, मां का दिल वीरान

आज मदर्स डे है। हर मां का लाल सोशल मीडिया पर मां से जुड़े संदेशों में व्यस्त है। ये बच्चे ऐसे भी हैं जो अपनी मां को अपने साथ रखकर उनका आशीर्वाद आज भी ले रहे हैं। इनमें वे सुपुत्र भी हैं जिनकी बुजुर्ग वृद्धाश्रम में अपने जीवन की संध्या गुजार रहे हैं।

मां बोलीं- मजबूर होंगे बच्चे

आइये आज आपको ले चलते हैं कर्णनगरी स्थित निर्मल धाम वृद्धाश्रम में। यहां की तस्वीर किसी के भी दिल को झकझोर देने के लिए काफी हैं। यहां रहने वाली माताओं के दिलों में आज भी वही भावना है जो पहले हुआ करती थी। आज उनके बच्चों ने उन्हें इस आश्रम में भेजकर अपने फर्ज से इतिश्री जरूर कर लीं, लेकिन मां आज भी उनक बचाव करते हुए उनकी इस बेशर्मी को मजबूरी करार देने से पीछे नहीं हटतीं। ऐसा करने वाली एक-दो मां नहीं बल्कि दर्जनों माताएं हैं। कई माताएं ऐसी भी हैं जिनके बच्चे बड़े कारोबारी और अधिकारी हैं। कई विदेशों में भी रह रहे हैं, लेकिन इन माताओं के लिए उनके यहां जगह नहीं है।

मां बोलीं अब आश्रम ही घर

जब इन माताओं को मातृ दिवस याद दिलाया तो वे कांपती आवाज में उन्होंने कहा कि अब तो यही आश्रम हमारा घर है और यहां सेवा करने वाले ही हमारा परिवार हैं। बच्चे जब भी आते हैं, तो कुछ लेकर ही जाते हैं। इतनी शिकायतें होते हुए भी वे किसी से कुछ नहीं कहती। केवल यही कहती हैं कि बच्चे जहां भी रहें, खुश रहें… भगवान उन्हें लंबी उम्र दे।

ये कर्मों का फल है : मां

एक मां ने भावुक होकर कहा कि सब कर्मों का फल है। जब मैं यहां आई तो मेरा बेटा और मैं एक साथ रोई थी। आज उनका पोता ऑस्ट्रेलिया में है। अब तो आश्रम ही उनका परिवार बन गया है। दूसरी मां ने कहा कि बच्चों को लगता है कि बुजुर्ग बोझ हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि आने वाली पीढ़ी को संस्कार देने के लिए बुजुर्ग बहुत जरूरी हैं।

मिलने आते हैं लेने नहीं

आश्रम की एक मां ने बताया कि वह कई सालों से इस आश्रम में रह रही है। घर में अकसर झगड़े रहते थे। इसलिए परिवार ने यहां छोड़ दिया। हर त्योहार पर बच्चों का इंतजार रहता है। वे कभी-कभी आते तो हैं, लेकिन कुछ समय रहने के बाद लौट जाते हैं। हर बार मन में आता है कि वे शायद इस बार लेने के लिए आएं।

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