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Chemist Strike: देशभर में आज केमिस्टों की हड़ताल, 15 लाख से अधिक मेडिकल स्टोर्स बंद: जानें क्यों नाराज़ है AIOCD

Chemists' Strike Today

Chemists' Strike Today

नई दिल्ली: देशभर में आज दवा विक्रेताओं द्वारा एक बड़ी हड़ताल की जा रही है। जिसमें करीब 15 लाख से ज्यादा मेडिकल स्टोर्स ने अपने शटर बंद हैं। यह हड़ताल ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट (AIOCD) के आह्वान पर की गई है। संगठन का कहना है कि सरकार की कुछ नीतियों और ऑनलाइन दवा बिक्री से जुड़े नियमों के कारण पारंपरिक केमिस्ट व्यवसाय पर गंभीर असर पड़ रहा है।

AIOCD का मुख्य विरोध दो सरकारी नोटिफिकेशन-GSR 220(E) और GSR 817(E)-को लेकर है। संगठन का आरोप है कि इन प्रावधानों से ई-फार्मेसी कंपनियों को एक “अस्पष्ट कानूनी दायरे” में काम करने की छूट मिल रही है। उनका कहना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री के लिए प्रिस्क्रिप्शन जांच, वितरण नियम और जवाबदेही को लेकर स्पष्ट व सख्त ढांचा मौजूद नहीं है।

महाराष्ट्र के सोलापुर में भी इस हड़ताल का व्यापक असर देखा गया, जहां हजारों दवा विक्रेताओं ने दुकानें बंद रखकर विरोध प्रदर्शन किया और ई-फार्मेसी पर कड़े नियंत्रण की मांग उठाई।

AIOCD की प्रमुख मांगें

संगठन ने सरकार से कई अहम मांगें रखी हैं, जिनमें ये प्रमुख हैं:

-ऑनलाइन दवा बिक्री में “प्रेडेटरी प्राइसिंग” पर सख्त रोक लगाई जाए।

-ई-फार्मेसी और बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों की निगरानी व जांच की जाए।

-NPPA, DCGI, CCI और राज्य ड्रग कंट्रोलर को प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए जाएं।

-प्रिस्क्रिप्शन की डुप्लीकेसी रोकने के लिए मजबूत डिजिटल सिस्टम लागू किया जाए।

-प्रतिबंधित दवाओं की अवैध बिक्री पर पूर्ण रोक लगाई जाए।

-डॉक्टरों और केमिस्टों का अनिवार्य और सख्त पंजीकरण किया जाए।

-ऐसा QR-आधारित सिस्टम, जो एक बार उपयोग के बाद दोबारा इस्तेमाल न हो सके।

-सभी प्रक्रियाओं के लिए सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाए।

-AIOCD का कहना है कि यदि सरकार एक सुरक्षित और पारदर्शी प्रणाली लागू करती है, तो संगठन पूरा सहयोग देने को तैयार है।

ऑनलाइन दवा बिक्री पर आपत्ति

संगठन के महासचिव राजीव सिंघल के अनुसार, कई ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म बिना उचित सत्यापन के दवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। उनका दावा है कि इससे फर्जी प्रिस्क्रिप्शन के जरिए दवाओं के दुरुपयोग की आशंका बढ़ जाती है।

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केमिस्टों का तर्क है कि पारंपरिक मेडिकल स्टोर्स सख्त नियमों के तहत काम करते हैं और सभी प्रतिबंधित दवाओं का रिकॉर्ड रखते हैं, जबकि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर यह नियंत्रण उतना प्रभावी नहीं है। इसके अलावा, दवा विक्रेताओं ने यह भी चिंता जताई है कि ऑनलाइन कंपनियों द्वारा भारी छूट दिए जाने से बाजार का संतुलन बिगड़ रहा है, जबकि रिटेल केमिस्टों का मार्जिन सीमित होता है।

देश में लगभग 12.5 लाख दवा विक्रेता हैं, जिनमें दिल्ली में करीब 15,000 और बिहार में लगभग 40,000 मेडिकल स्टोर्स शामिल हैं। हड़ताल 19 मई की मध्यरात्रि से 20 मई की मध्यरात्रि तक प्रभावी रही। हालांकि, संगठन ने आश्वासन दिया है कि आम जनता को आवश्यक सेवाओं में परेशानी न हो, इसका पूरा ध्यान रखा गया है।

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