Natural Gas: आज के दौर में रसोई से लेकर सड़कों तक, गैस हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुकी है। भारत में मुख्य रूप से चार तरह की गैसों LPG, PNG, CNG और LNG का उपयोग होता है, जिनका काम भले ही ईंधन देना हो, लेकिन इनकी प्रकृति और इस्तेमाल अलग-अलग है।
घर-घर की जरूरत: LPG
लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस यानी LPG देश के करोड़ों घरों की रसोई की रीढ़ है। यह कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के प्रसंस्करण से बनती है और सिलेंडरों में तरल रूप में भरकर पहुंचाई जाती है। सरकारी योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना ने इसकी पहुंच दूरदराज के गांवों तक बढ़ाई है।
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सुविधाजनक विकल्प: PNG
पाइप्ड नेचुरल गैस यानी PNG उन लोगों के लिए आसान विकल्प है जो सिलेंडर की झंझट से बचना चाहते हैं। पाइपलाइन के जरिए सीधे घर तक पहुंचने वाली यह गैस सुरक्षित और उपयोग के हिसाब से बिलिंग वाली व्यवस्था देती है।
पर्यावरण के लिए बेहतर: CNG
कंप्रेस्ड नेचुरल गैस यानी CNG मुख्य रूप से वाहनों में इस्तेमाल होती है। पेट्रोल-डीजल के मुकाबले कम प्रदूषण फैलाने वाली यह गैस शहरों में तेजी से लोकप्रिय हो रही है और प्रदूषण नियंत्रण में मददगार मानी जाती है।
सप्लाई चेन की ताकत: LNG
लिक्विफाइड नेचुरल गैस यानी LNG गैस सप्लाई का अहम हिस्सा है। इसे बेहद कम तापमान पर तरल बनाकर जहाजों से एक देश से दूसरे देश तक पहुंचाया जाता है। भारत भी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में LNG आयात करता है।
कैसे जुड़ी हैं ये सभी गैसें?
LNG को आयात कर दोबारा गैस में बदला जाता है और पाइपलाइन के जरिए PNG के रूप में घरों व उद्योगों तक पहुंचाया जाता है, जबकि CNG के रूप में वाहनों में उपयोग होता है। वहीं LPG उन जगहों के लिए जरूरी बनी रहती है, जहां पाइपलाइन पहुंचाना संभव नहीं।

