Last Updated: October 4, 2026

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NIA अदालत ने अल-कायदा से जुड़े तीन कट्टरपंथियों को आजीवन कारावास की सुनायी सजा

April 14, 2026

NIA अदालत ने अल-कायदा से जुड़े तीन कट्टरपंथियों को आजीवन कारावास की सुनायी सजा

नयी दिल्ली: लखनऊ की एक विशेष एनआईए अदालत ने 2021 के अल-कायदा से जुड़े कट्टरपंथ और भर्ती मामले में तीन और आरोपियों को सजा सुनाई है।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अदालत ने सोमवार को आरोपी मुसीरुद्दीन उर्फ राजू (लखनऊ) और मिन्हास अहमद उर्फ मिन्हास (लखनऊ), तथा तौहीद अहमद शाह उर्फ सोबू शाह (बडगाम) को पांच साल के कठोर कारावास से लेकर आजीवन कारावास तक की अलग-अलग जेल की सजा सुनायी। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी और अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 20,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

इन तीनों को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), गैर-कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए), विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया। मामले के तीन अन्य आरोपियों शकील, मोहम्मद मुस्तकीम और मोहम्मद मोईद को आर्म्स एक्ट के तहत अपना अपराध स्वीकार करने के बाद पहले ही दोषी ठहराया जा चुका था। एनआईए ने 2022 में दो चार्जशीट के जरिए सभी छह आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किये थे।

यह मामला मूल रूप से उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा जुलाई 2021 में उत्तर प्रदेश एंटी टेररिज्म स्क्वॉड द्वारा प्रतिबंधित अल-कायदा आतंकवादी संगठन के सदस्य मुसीरुद्दीन और मिन्हास की गिरफ्तारी के बाद दर्ज किया गया था। जांच में पाया गया कि ये दोनों लखनऊ में अल-कायदा (एक्यूआईएस) के एक मॉड्यूल के रूप में ‘अंसार गजवत-उल-हिंद’ (एजीएच) स्थापित करने के लिए युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और भर्ती करने में शामिल थे।इस साजिश का उद्देश्य 2021 के स्वतंत्रता दिवस समारोह से पहले राजधानी लखनऊ सहित उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देना था। एनआईए की जांच में सामने आया कि मिन्हास को तौहीद और एक अन्य आरोपी आदिल नबी तेली उर्फ मूसा ने कट्टरपंथी बनाया था।

जांच में यह भी पता चला कि मुसीरुद्दीन ने मिन्हास के कहने पर ‘बैयत’ (निष्ठा की शपथ) ली थी। इसके बाद, देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश के तहत मुसीरुद्दीन और मिन्हास ने शकील, मुस्तकीम और मोईद की मदद से हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री इकट्ठा की थी।

गौरतलब है कि आरोपी मूसा, जो लश्कर-ए-तैयबा के सहयोगी संगठन टीआरएफ से जुड़ा था, मार्च 2022 में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया था।

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