नेशनल डेस्क: खुद का घर होना हर इंसान का सपना होता है, लेकिन महंगाई के दौर में घर बनवाना कई लोगों के लिए मुश्किल हो जाता है। जमीन खरीदने के बाद सीमेंट, सरिया, ईंट, मजदूरी और अन्य निर्माण सामग्री पर इतना खर्च हो जाता है कि आम परिवार का बजट बिगड़ जाता है। इसी कारण बहुत से लोग सालों तक किराए के मकान में रहने को मजबूर रहते हैं।
अब इस सोच को बदलने की दिशा में एक नई पहल सामने आई है। देश की सरकारी बिजली कंपनी NTPC ने एक ऐसा घर बनाने का मॉडल तैयार किया है, जिसे बनाने के लिए न तो सीमेंट की जरूरत होती है और न ही सरिया या स्टील की। सबसे खास बात यह है कि इस घर को बहुत कम लागत में तैयार किया जा सकता है, जिससे कम आय वाले परिवार भी अपना घर बनाने का सपना पूरा कर सकते हैं।
बेहद कम खर्च में बन सकता है घर
NTPC द्वारा तैयार किए गए इस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत इसकी कम लागत है। जानकारी के मुताबिक, इस घर को करीब 1.5 लाख से 2.5 लाख रुपये के बीच बनाया जा सकता है। यदि इसे सरकारी आवास योजनाओं के तहत बनाया जाए तो इसकी लागत लगभग डेढ़ लाख रुपये तक रह सकती है। वहीं कोई व्यक्ति इसे निजी तौर पर बनवाता है तो करीब ढाई लाख रुपये तक खर्च आ सकता है।
करीब 300 वर्ग फीट में बनने वाले इस घर में एक बेडरूम, छोटा हॉल, किचन और टॉयलेट-बाथरूम की सुविधा दी जाती है। सीमित जगह के बावजूद इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि परिवार आराम से रह सके। कम बजट के कारण यह मॉडल खासतौर पर उन लोगों के लिए बेहतर माना जा रहा है, जो कम पैसों में अपना पक्का घर बनाना चाहते हैं।
मौसम के अनुसार आरामदायक डिजाइन
इस घर की डिजाइनिंग इस तरह की गई है कि अंदर का तापमान संतुलित बना रहे। गर्मियों में यह घर अपेक्षाकृत ठंडा रहता है, जबकि सर्दियों में अंदर गर्माहट बनी रहती है। इसका फायदा यह है कि घर में रहने वाले लोगों को ज्यादा कूलिंग या हीटिंग उपकरणों पर खर्च नहीं करना पड़ता। कई मामलों में एयर कंडीशनर या हीटर की जरूरत भी कम पड़ सकती है। इस वजह से इसे ऊर्जा बचाने वाला घर भी माना जा रहा है। कम लागत के साथ-साथ बिजली की खपत भी कम होने की संभावना है। यही कारण है कि यह मॉडल खासतौर पर मध्यम वर्ग और कम आय वाले परिवारों के लिए एक अच्छा विकल्प बन सकता है।
राख से बने खास ब्लॉक्स से होता है निर्माण
इस घर को बनाने का तरीका पारंपरिक मकानों से बिल्कुल अलग है। इसके निर्माण में इंडस्ट्रियल एरिया से निकलने वाली राख यानी फ्लाई ऐश का उपयोग किया जाता है। इस राख से विशेष प्रकार के इंटरलॉकिंग वॉल ब्लॉक्स तैयार किए जाते हैं।
इन ब्लॉक्स की खासियत यह है कि इन्हें एक के ऊपर एक रखने पर यह खुद ही आपस में लॉक हो जाते हैं। इसलिए इन्हें जोड़ने के लिए सीमेंट, प्लास्टर या अतिरिक्त सामग्री की जरूरत नहीं पड़ती। इससे निर्माण का समय भी कम लगता है और लागत भी घट जाती है।
इन ब्लॉक्स को मजबूत भी बताया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि तेज हवा, तूफान या हल्के भूकंप जैसी परिस्थितियों में भी यह घर सुरक्षित रह सकता है। कम खर्च, आसान निर्माण और ऊर्जा की बचत जैसे फायदों के कारण यह मॉडल भविष्य में सस्ते और टिकाऊ घरों के निर्माण में अहम भूमिका निभा सकता है।

