
चंडीगढ़। पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम आदमी को परेशान कर दिया है। करीब 15 दिनों में कई बार हुए रेट संशोधन के बाद हरियाणा में पेट्रोल ₹103.35 प्रति लीटर और डीजल ₹95.98 प्रति लीटर तक पहुंच गया है।
लगातार बढ़ रहे दामों से ट्रांसपोर्ट सेक्टर, घरेलू बजट और रोजमर्रा की आवाजाही का खर्च बढ़ रहा है। पेट्रोल पंप संचालकों के अनुसार इस अवधि में पेट्रोल करीब ₹7 से ₹8 प्रति लीटर तक महंगा हुआ है, जबकि डीजल में भी लगभग ₹7 प्रति लीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सबसे बड़ा झटका 15 मई को लगा था, जब पेट्रोल और डीजल दोनों के दामों में करीब ₹3 प्रति लीटर तक इजाफा हुआ। इसके बाद 19, 20, 22, 23 और 25 मई को भी कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। साढौरा क्षेत्र के एक पेट्रोल पंप पर पेट्रोल ₹103.35 प्रति लीटर और डीजल ₹95.98 प्रति लीटर दर्ज किया।
इस बढ़ोतरी की बड़ी वजह तनाव है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष के कारण ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल की सप्लाई प्रभावित हुई है। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में रुकावट आने से ऑयल की आवाजाही पर असर पड़ा है। इस वजह से इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं। भारत दुनिया की उन बड़ी इकोनॉमी में शामिल था। जहां सरकार और सरकारी ऑयल कंपनियों ने लंबे समय तक पेट्रोल-डीजल के रेट नहीं बढ़ाए। IOC, BPCL और HPCL पिछले 11 सप्ताह से बढ़ती लागत के बावजूद पुराने रेट पर तेल बेच रही थीं। नुकसान बढ़ने के बाद कंपनियों के लिए पुराने रेट पर बिक्री रखना मुश्किल हो गया है। इसके बाद कीमतों को बढ़ाना पड़ा।
तारीख- पेट्रोल- डीजल
ट्रांसपोर्टर वीरेंद्र सिंह का कहना है कि डीजल महंगा होने से ट्रकों और कॉमर्शियल वाहनों का संचालन खर्च लगातार बढ़ रहा है। इसका असर फल-सब्जी, निर्माण सामग्री और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर दिखाई देगा। ट्रांसपोर्ट सेक्टर पहले से ही बढ़ती लागत के दबाव में चल रहा है और अब ईंधन की कीमतों ने परेशानी और बढ़ा दी है। निजी वाहन चालक हरीश, नरेंद्र, अश्वनी, राजेंद्र और भगवान दास ने कहा कि रोजाना नौकरी और कारोबार के लिए आने-जाने का खर्च काफी बढ़ गया है। पेट्रोल ₹100 से ऊपर पहुंचने के बाद बाइक और कार चलाना मध्यम वर्ग के लिए महंगा हो गया है।
महिलाओं ने भी बढ़ती कीमतों पर चिंता जताई। अंबाला शहर की मॉडल टाउन की कविता रानी, प्रेम नगर निवासी मान्यता और विकास नगर की रजनी देवी ने कहा कि पेट्रोल-डीजल महंगा होने से घरेलू बजट पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। रसोई, बच्चों की पढ़ाई और अन्य खर्चों के बीच अब वाहन खर्च संभालना मुश्किल होता जा रहा है।
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