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बस्तर पंडुम महोत्सव: अमित शाह बोले- पीएम मोदी ने आदिवासी संस्कृति को पहचान दिलाई

PM Modi has given recognition to tribal culture

PM Modi has given recognition to tribal culture

नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में आयोजित बस्तर पंडुम महोत्सव के समापन समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शामिल हुए। इस मौके पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि पीएम मोदी ने आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपराओं और जीवनशैली को देशभर में पहचान दिलाने का काम किया है।

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अमित शाह का भाषण 

अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने आदिवासी संस्कृति, भोजन और विरासत को बढ़ावा देने के साथ-साथ वन संसाधनों से बने उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर जोर दिया, जिससे आदिवासी समुदायों को रोज़गार के नए अवसर मिले हैं। उन्होंने कहा कि इससे आदिवासी समाज आत्मनिर्भर बन रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती को पूरे देश में ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाया गया, जो आदिवासी समाज के योगदान को सम्मान देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

बस्तर पंडुम महोत्सव में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। इस महोत्सव में पारंपरिक हस्तशिल्प, आदिवासी नृत्य, लोक गीत, पारंपरिक वेशभूषा, स्वदेशी भोजन और वन आधारित उत्पादों को प्रदर्शित किया गया। इस आयोजन ने न सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि बाहर के राज्यों से भी लोगों को आकर्षित किया।

 

यह महोत्सव पुरानी परंपराओं को बचाने में मदद कर रहा 

इस महोत्सव का उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 6 फरवरी को किया। उन्होंने भी बस्तर की समृद्ध आदिवासी संस्कृति की सराहना की। यह महोत्सव 9 फरवरी तक चला। पारंपरिक भोजन की जांच करने वाले निर्णायक मंडल के सदस्य सोमारू राम कवासी ने बताया कि यह महोत्सव आदिवासी खान-पान की पुरानी परंपराओं को बचाने में मदद कर रहा है। उन्होंने बताया कि यहां बिना तेल के, सिर्फ नमक, मिर्च और इमली से बने पारंपरिक व्यंजन पेश किए गए, जो स्वाद के साथ-साथ सेहतमंद भी हैं।

एक प्रतिभागी निशा नाग ने कहा कि बस्तर पंडुम ने उन खाद्य परंपराओं को फिर से जिंदा किया है, जो धीरे-धीरे खत्म हो रही थीं। उन्होंने बताया कि यहां 40 से ज्यादा तरह के पारंपरिक पेय और कई प्रकार के दलिया प्रदर्शित किए गए। लोक कलाकार शानू मार्कंडेय ने कहा कि उन्हें इतने बड़े मंच पर अपनी कला दिखाने का मौका मिला, जिसके लिए उन्होंने आदिवासी विकास विभाग का धन्यवाद किया। उन्होंने बताया कि उनकी प्रस्तुति में मां दंतेश्वरी की प्रार्थना, लोक गीत और बस्तर के प्रमुख त्योहारों की झलक दिखाई गई।

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बस्तर पंडुम महोत्सव महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ

लोक कलाकार संगीता मरकाम, जिन्होंने राष्ट्रपति के सामने प्रस्तुति दी, ने कहा कि यह उनके जीवन का सबसे गर्व का पल था। उन्होंने ज़ोर दिया कि अगर आदिवासी परंपराएं खत्म हो गईं, तो आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों को नहीं जान पाएंगी, इसलिए इन्हें बचाना बहुत जरूरी है। कुल मिलाकर, बस्तर पंडुम महोत्सव आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और जीवनशैली को संजोने और आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।

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