Last Updated: October 1, 2026

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Raghav Chadha को हाईकोर्ट से मिली राहत, आपत्तिजनक पोस्ट हटाने का दिया आदेश

July 1, 2026

Raghav Chadha को हाईकोर्ट से मिली राहत, आपत्तिजनक पोस्ट हटाने का दिया आदेश

Raghav Chadha: दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा को आंशिक राहत देते हुए उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई पांच प्रथमदृष्टया मानहानिकारक पोस्ट हटाने का आदेश दिया। हालांकि, अदालत ने उनके पर्सनैलिटी और पब्लिसिटी राइट्स की व्यापक सुरक्षा देने या बाकी सभी पोस्ट हटाने के लिए कोई अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति सुब्रमोनियम प्रसाद की एकल पीठ ने कहा कि पहली नजर में इस मामले में पर्सनैलिटी राइट्स का कोई उल्लंघन नहीं दिखाई देता।

अदालत ने कहा, “इस मामले में पर्सनैलिटी राइट्स का सवाल नहीं बनता। मैंने केवल पांच दस्तावेज हटाने का आदेश दिया है। बाकी सामग्री पहली नजर में मानहानिकारक नहीं है।”

तस्वीरों का बिना अनुमति इस्तेमाल
राघव चड्ढा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद सोशल मीडिया पर उनके नाम, तस्वीर, पहचान और छवि का बिना अनुमति इस्तेमाल किया गया। कई पोस्ट में यह दिखाने की कोशिश की गई कि उन्होंने ‘पैसों के लिए खुद को बेच दिया।’

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याचिका में की गई ये मांग
याचिका में यह भी कहा गया था कि उनके खिलाफ एआई से तैयार सामग्री, डीपफेक वीडियो, मॉर्फ्ड तस्वीरें, कृत्रिम आवाज (सिंथेटिक वॉयस क्लोनिंग) और फर्जी भाषण सोशल मीडिया पर प्रसारित किए गए, जिन्हें हटाने का आदेश दिया जाए।

इस मामले में मई महीने में अंतरिम राहत पर फैसला सुरक्षित रखते समय भी हाई कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी की थी कि पहली नजर में यह मामला राजनीतिक फैसले की आलोचना से जुड़ा लगता है, न कि पर्सनैलिटी राइट्स के उल्लंघन से।

आलोचना और मानहानि के बीच सीमा
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा था, “पहली नजर में यहां पर्सनैलिटी राइट्स का कोई मामला नहीं बनता। राजनीतिक क्षेत्र में लिए गए आपके फैसले की आलोचना की जा रही है।”

कोर्ट ने यह भी कहा था कि आलोचना और मानहानि के बीच की सीमा बहुत पतली होती है, लेकिन केवल पर्सनैलिटी राइट्स के आधार पर अंतरिम रोक लगाने की जरूरत इस मामले में नहीं दिखती।

छवि को नुकसान पहुंचाने वाली पोस्ट
राघव चड्ढा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव नायर ने अदालत में दलील दी थी कि कुछ पोस्ट सामान्य आलोचना से कहीं आगे बढ़कर उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने वाली और मानहानिकारक हैं। उन्होंने विशेष रूप से उन तस्वीरों का जिक्र किया, जिनमें प्रधानमंत्री को राघव चड्ढा पर नोटों की बारिश करते हुए दिखाया गया था, साथ ही अन्य मॉर्फ्ड तस्वीरें भी पेश की गई थीं।

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याचिका में आवश्यक संशोधन जरूरी
राजीव नायर ने कहा कि इस तरह की सामग्री अशोभनीय है और इससे राघव चड्ढा की प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुंचा है। हालांकि, अदालत ने मौखिक रूप से स्पष्ट किया कि यह मामला मानहानि का अधिक प्रतीत होता है, न कि पर्सनैलिटी राइट्स का। न्यायमूर्ति सुब्रमोनियम प्रसाद ने यह भी कहा था कि यदि राघव चड्ढा मानहानि का दावा करना चाहते हैं, तो वे अपनी याचिका में आवश्यक संशोधन कर सकते हैं।

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