Last Updated: October 5, 2026

Dainik Savera Times Logo

‘बच्चे सिर्फ मां की नहीं, पिता की भी जिम्मेदारी’, राघव चड्ढा ने संसद में उठाया ‘पैटरनिटी लीव’ का मुद्दा

March 31, 2026

‘बच्चे सिर्फ मां की नहीं, पिता की भी जिम्मेदारी’, राघव चड्ढा ने संसद में उठाया ‘पैटरनिटी लीव’ का मुद्दा

नेशनल डेस्क। देश में पितृत्व अवकाश (पैटरनिटी लीव) को कानूनी अधिकार बनाने की मांग तेज होती जा रही है। आम आदमी पार्टी के नेता और राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा ने संसद में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि भारत में केयरगिविंग की जिम्मेदारी सिर्फ मां पर डालना एक बड़ी सामाजिक और कानूनी कमी है।

राघव चड्ढा ने कहा कि जब किसी बच्चे का जन्म होता है, तो बधाई माता-पिता दोनों को मिलती है, लेकिन उसकी देखभाल की जिम्मेदारी पूरी तरह से मां पर डाल दी जाती है। उन्होंने इसे ‘समाज की विफलता’ बताया। उन्होंने कहा कि हमारा सिस्टम सिर्फ मातृत्व अवकाश (मेटरनिटी लीव) को मान्यता देता है, जबकि पिता की भूमिका को नजरअंदाज किया जाता है।

उन्होंने संसद में मांग करते हुए कहा कि पितृत्व अवकाश को कानूनी अधिकार बनाया जाना चाहिए, ताकि पिता को अपने नवजात बच्चे और पत्नी की देखभाल के लिए नौकरी और परिवार के बीच चुनाव न करना पड़े। राघव चड्ढा ने कहा, “एक मां को गर्भावस्था के नौ महीनों के बाद, सामान्य या सिजेरियन डिलीवरी जैसी कठिन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। ऐसे समय में उसे दवाइयों के साथ-साथ अपने पति के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक सहयोग की बेहद जरूरत होती है।”

राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा ने यह भी स्पष्ट किया कि पति की जिम्मेदारी सिर्फ बच्चे तक सीमित नहीं होती, बल्कि पत्नी की देखभाल करना भी उतना ही जरूरी है। इस समय पति की मौजूदगी कोई लग्जरी नहीं, बल्कि एक आवश्यकता है। उन्होंने आंकड़ों का जिक्र करते हुए बताया कि फिलहाल केवल केंद्र सरकार के कर्मचारियों को ही 15 दिन का पितृत्व अवकाश मिलता है, जबकि निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के पास यह अधिकार नहीं है। भारत की करीब 90 प्रतिशत कार्यबल प्राइवेट सेक्टर में काम करती है, यानी अधिकांश पिता इस सुविधा से वंचित हैं।

राघव चड्ढा ने उदाहरण देते हुए कहा कि स्वीडन, आइसलैंड और जापान जैसे देशों में पितृत्व अवकाश 90 दिनों से लेकर 52 हफ्तों तक कानूनी रूप से सुनिश्चित किया गया है। उन्होंने सरकार से अपील की कि कानून को समाज का आईना होना चाहिए और इसमें यह स्पष्ट दिखना चाहिए कि बच्चे की देखभाल सिर्फ मां की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि माता और पिता दोनों की साझा जिम्मेदारी है।

खबरें और भी हैं...

Copyright © 2025 Dainik Savera Times. All rights reserved.
ऐप खोलें