Last Updated: November 6, 2026

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गुरसिख छात्रा को कृपाण के साथ राजस्थान में पेपर देने से रोका, SGPC बोली- यह सिखों का अपमान

July 28, 2025

गुरसिख छात्रा को कृपाण के साथ राजस्थान में पेपर देने से रोका, SGPC बोली- यह सिखों का अपमान

अमृतसर Exam : तरनतारन से राजस्थान में जयपुर की पूर्णिमा यूनिवर्सिटी में आयोजित न्यायिक सेवा परीक्षा (पीसीएस-जे) में शामिल होने पहुंची एक सिख छात्र को उसके धार्मिक प्रतीकों (ककार) की वजह से परीक्षा केंद्र में जाने से रोक दिया गया। छात्रा का आरोप है कि सिक्योरिटी स्टाफ ने उससे ककार उतारने के लिए कहा, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। इस कारण छात्रा परीक्षा केंद्र के अंदर नहीं जा सकी। जिससे, उसका एग्जाम छूट गया। मौके से ही उसने घटना के कुछ वीडियो बनाकर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) को ईमेल किए। इस घटना को एसजीपीसी ने धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया है।

राजस्थान के सीएम से इस मामले में जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई की मांग की
वहीं, पंजाब की राजनीतिक पार्टियां भी राजस्थान के सीएम से इस मामले में संज्ञान लेकर जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई की मांग कर रही हैं। वहीं, यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार ने इस कार्रवाई को गाइडलाइन के अनुरूप बताया। साथ ही यह भी कहा कि इसमें यूनिवर्सिटी का कोई लेना-देना नहीं है। एग्जामिन बॉडी की ओर से यह कार्रवाई की गई थी।

छात्रा ने बताई पूरी घटना
वहीं, जब यह घटना हुई। उसके बाद छात्रा गुरप्रीत कौर ने वीडियो में कहा कि जयपुर की पूर्णिमा यूनिवर्सिटी में उसकी ज्यूडिशियरी की परीक्षा थी। परीक्षार्थी की तरह मैं भी इस यूनिवर्सिटी में परीक्षा देने आई। रोल नंबर लिस्ट में है। मैं कुछ भी ऐसा सामान लेकर नहीं आई, जो अलाऊड नहीं था। फिर भी मुझे नहीं जाने दिया गया। छात्र ने आगे कहा कि आर्टिकल-25 में लिखा है कि मैं किरपाण लेकर चल सकती हूं, लेकिन कहा जा रहा है कि हाईकोर्ट के आदेश हैं कि किरपाण-कड़ा कुछ भी नहीं ले जा सकते। महिलाओं के ड्रेस कोड को लेकर एक नियम पढ़कर सुनाया गया है। कोई शार्प ऑब्जैक्ट नहीं ले जा सकते। गुरप्रीत कौर ने कहा कि इसमें सिख की कृपाण को लेकर नियम नहीं है। यहां एक प्वाइंट और जोड़ देते कि अमृतधारी सिख को किरपाण के बिना आना होगा। अगर ये जोड़ा होता तो शायद मैं यहां का फॉर्म ही नहीं भरतीं और यहां नहीं आना पड़ता। छात्र ने बताया कि 10 बजे पेपर शुरू होना था। सवा 9 बजे एंट्री शुरू हुई। मैं पहली परीक्षार्थी थी, जो लाइन में खड़ी थी और मुङो सबसे पहले बाहर निकाला गया। पिछले साल भी इस तरह की दिक्कत आई थी। शायद हर साल बच्चे इसी का सामना करते होंगे। जिन्होंने उतार दिया, वे अंदर चले गए। उनके लिए शायद पेपर ज्यादा जरूरी था।

राजस्थान के मुख्यमंत्री तुरंत हस्तक्षेप करे : धामी
शिरोमणि गरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि शिरोमणि कमेटी जल्द ही एक प्रतिनिधिमंडल राजस्थान भेजेगी। जो, राजस्थान सरकार से इस मामले पर चर्चा करेगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए कहेगा। उन्होंने कहा कि यह देश के संविधान का घोर उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि एक गुरसिख लड़की को कृपाण सहित परीक्षा में शामिल होने से रोकने वाले परीक्षा केंद्र के अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। जिनकी, मनमानी के कारण एक लड़की परीक्षा से वंचित रह गई। धामी ने राजस्थान के मुख्यमंत्री से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने और सिख लड़की को पेपर देने से रोकने वाले दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि ऐसी घटना को रोकने के लिए कानून बनाया जाए।

मामले को राजस्थान हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार के समक्ष उठाएंगे :?इकबाल सिंह लालपुरा
राजस्थान उच्च न्यायालय (जोधपुर) सिविल जज भर्ती परीक्षा देने गई अमृतधारी उम्मीदवार गुरप्रीत कौर को कृपाण धारण करके परीक्षा में शामिल न होने देने के मामले में सचिवालय अकाल तख्त साहिब के अधिकारी ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष इकबाल सिंह लालपुरा के साथ विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि आयोग ने पहले ही आदेश जारी कर दिए हैं कि अमृतधारी सिख अभ्यर्थी अपनी कृपाण के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रवेश कर सकते हैं। लालपुरा ने आश्वासन दिया कि वे इस नवीनतम मामले को राजस्थान उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार के समक्ष भी उठाएंगे।

परीक्षा में अमृतधारी उम्मीदवारों को प्रवेश न देना संविधान का उल्लंघन : जत्थेदार गड़गज
श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने राजस्थान उच्च न्यायालय (जोधपुर) सिविल जज भर्ती परीक्षा देने गई अमृतधारी उम्मीदवार गुरप्रीत कौर को कृपाण धारण करके परीक्षा में शामिल न होने देने का कड़ा संज्ञान लिया और इसे भारतीय संविधान का घोर उल्लंघन तथा सिखों के प्रति घृणित भेदभाव बताया। उन्होंने इसकी निंदा करते हुए राजस्थान की भाजपा सरकार से सवाल किया कि खुद को सिखों की हमदर्द कहने वाली भाजपा बताए कि वह सिखों के हितों की रक्षा कैसे कर रही है। जत्थेदार ने अकाली दल और एसजीपीसी को आदेश दिया कि वे ताजा व पुराने मामलों को लेकर तुरंत एक उच्च स्तरीय संयुक्त प्रतिनिधिमंडल बनाएं और प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, राजस्थान के मुख्यमंत्री और राजस्थान उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार से मिलकर इस भेदभाव के खिलाफ कड़ी आपत्ति दर्ज कराएं। जत्थेदार कुलदीप सिंह ने कहा कि इकबाल सिंह लालपुरा एक महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर कार्यरत हैं और वह एक सिख भी हैं, इसलिए यह सुनिश्चित करना उनका पहला कर्तव्य है कि देश में कहीं भी सिखों के साथ ऐसा भेदभाव न हो। जत्थेदार ने लालपुरा को आदेश दिया कि वह इस मामले में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से मिले और श्री अकाल तख्त साहिब को किए गए प्रयासों की पूरी रिपोर्ट भेजें।

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