Last Updated: September 23, 2026

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वामपंथी इतिहासकारों ने दलित नेताओं की वीरता को किया दरकिनार: राजनाथ सिंह

November 16, 2025

वामपंथी इतिहासकारों ने दलित नेताओं की वीरता को किया दरकिनार: राजनाथ सिंह

लखनऊ। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि वामपंथी इतिहासकारों ने अपनी सुविधानुसार इतिहास को लिखा, जिसमें दलित और पिछड़े समाज के नेताओं की वीरता और बलिदान को दरकिनार किया गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह रविवार को राजधानी में आयोजित शहीद वीरांगना ऊदा देवी के शहीदी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उनकी प्रतिमा का अनावरण भी किया गया। राजनाथ सिंह ने कहा कि दलित, आदिवासी, महिलाओं और पिछड़े समुदायों के असंख्य वीरों को इतिहास के पन्नों में उचित स्थान नहीं मिला। इन नायकों को न सिर्फ पढ़ाया जाना चाहिए था बल्कि उनको पूजा जाना चाहिए था। यह अत्यंत दुखद बात है कि इतिहासकारों ने पासी साम्राज्य पर कोई किताबें नहीं लिखीं। विद्वानों ने कभी इस वीर समुदाय के इतिहास पर रिसर्च नहीं की। पहले की सरकारों ने कभी भी पासी साम्राज्य के बारे में जानकारी एकत्र करने की कोशिश नहीं की।

 

उन्होंने कहा कि पूर्व की सरकारों ने भी पासी और दलित समाज के नायकों को उचित स्थान नहीं दिया। राजनाथ सिंह ने कहा कि एका आंदोलन में मदारी पासी का योगदान कौन ही भूल सकता है। मदारी पासी जी ने अन्याय के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूँका। जब किसानों पर बहुत अधिक लगान लगाया गया तो मदारी पासी जी ‘किसानों के मसीहा’ बनकर उभरे। मैं मदारी पासी जी को भी अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। पासी समाज जैसे समुदाय, जिन्होंने अपने पराक्रम, त्याग और संघर्ष से आजादी के आंदोलन को मजबूती दी, उन्हें इतिहास में उचित स्थान नहीं दिया गया, जबकि वे भी इस महान यात्रा के समान रूप से भागीदार और नायक थे।

परिणामस्वरूप, उन हाशिए पर रहे समुदायों के संघर्ष और बलिदान को नजरअंदाज कर दिया गया, जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता में अमूल्य योगदान दिया। उन्होंने कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को इस तरह प्रस्तुत किया गया मानो आज़ादी की लड़ाई केवल एक ही पार्टी और कुछ विशेष वर्गों या समुदायों ने लड़ी हो। इससे लोगों के मन में यह भ्रम पैदा हो गया कि स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व कुछ गिने-चुने लोगों ने किया था। रक्षा मंत्री ने कहा कि वह निःसंकोच कह सकता है कि भारत की आन-बान-शान की रक्षा के लिए भारत की हर बेटी ऊदा देवी बन सकती है। उन्होंने कहा कि हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान महिला पायलटों और महिला सैनिकों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

राजनाथ ने कहा कि ऊदा देवी जी ने अप्रतिम पराक्रम और अदम्य साहस से न सिर्फ अंग्रेजी सेना को धूल चटायी बल्कि राष्ट्र प्रेम का ऐसा मानक स्थापित किया है जो अनंत काल तक भारत के हर नागरिक को प्रेरित करता रहेगा। ऊदा देवी ने बता दिया था कि जब-जब भारत की ओर कोई आंख उठाकर देखेगा, तो भारत की हर बेटी भी उसका डटकर मुकाबला करेगी। उन्होंने कहा कि जब अंग्रेजों की एक बटालियन से लड़ते हुए ऊदा देवी शहीद हुईं, तब उनके मृत शरीर को देखकर ब्रिटिश अधिकारी भी उनके प्रति सम्मान में झुक गए थे। वीरांगना ऊदा देवी ने न केवल पासी समुदाय, बल्कि पूरे देश को गौरवान्वित किया है। प्रत्येक भारतीय को उन पर अत्यंत गर्व है। उन्होंने कहा कि ऊदा देवी जी की कहानी हमें आत्म-सम्मान सिखाती है। 1857 की क्रांति के इतिहास में ऊदा देवी पासी ने न केवल अंग्रेज़ी हुकूमत को चुनौती दी, बल्कि उस सामाजिक व्यवस्था को भी चुनौती दी जिसने उनके समाज को सदियों तक हाशिए पर रखा।

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