नई दिल्ली। राज्यसभा चुनाव की सियासी बिसात बिछ चुकी है। 21 जून को होने वाले 27 सीटों के इस चुनाव से पहले राजनीतिक दलों ने रणनीति बनानी शुरू कर दी है। भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए को उच्च सदन में मजबूत बहुमत मिलने की उम्मीद है।
अगली दिशा भी तय करेंगे ये चुनाव
मध्य प्रदेश में संभावित क्रॉस-वोटिंग और गुजरात में कांग्रेस के प्रतिनिधित्व पर मंडराते संकट ने चुनावी समीकरणों को रोमांचक बना दिया है। इन चुनावों के नतीजे न सिर्फ राज्यसभा की तस्वीर बदलेंगे, बल्कि आने वाले राजनीतिक घटनाक्रमों की दिशा भी तय करेंगे। देश के सियासी गलियारे में एक बार फिर राज्यसभा चुनाव के लिए सरगर्मी तेज हो गई हैं। राज्य स्तरीय चुनावों के बाद बदले राजनीतिक समीकरणों में इस महीने 27 सीटें भरने के लिए चुनाव होने जा रहे हैं। 18 जून को होने वाले इस चुनाव पर पूरे देश की पैनी नजर है, क्योंकि इसमें Cross-Voting का भी डर है।
नामांकन की आखिरी तारीख 8 जून
सत्ताधारी BJP ने कमर कस ली है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई चुनाव समिति की बैठक में रणनीति को अंतिम रूप दिया। चुनाव की अधिसूचना जारी हो चुकी है और नामांकन की आखिरी तारीख 8 जून है। वर्तमान में 245 सदस्यीय राज्यसभा में भाजपा के नेतृत्व वाले NDA गठबंधन के पास 148 सांसद हैं। इस चुनाव में जिन 27 सीटों पर वोटिंग होनी है, उनमें से भाजपा को 17 से 18 सीटें जीतने का पूरा अनुमान है। यदि ऐसा होता है तो राज्यसभा में NDA का आंकड़ा 150 के पार चला जाएगा। यह आंकड़ा NDA को संसद के उच्च सदन में ‘दो-तिहाई बहुमत’ के बेहद करीब ले जाएगा। इससे किसी भी संवैधानिक बिल को पास कराना आसान हो जाएगा।
इन दिग्गजों की होगी राज्यसभा से विदाई
इस चुनावी चक्र में देश के कई बड़े राजनीतिक चेहरों का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो रहा है, जिनमें शामिल हैं।
- मल्लिकार्जुन खरगे (कांग्रेस अध्यक्ष)
- एच.डी. देवेगौड़ा (पूर्व प्रधानमंत्री)
- दिग्विजय सिंह (मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री)
- जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू (केंद्रीय मंत्री)
मध्य प्रदेश में अटक रहीं कांग्रेस की सांसें
राज्यसभा चुनाव में सबसे बड़ा रोमांच और अनिश्चितता क्रॉस-वोटिंग होती है। इस बार मुख्य केंद्र मध्य प्रदेश है, जहां 3 सीटों पर चुनाव होना है। मध्य प्रदेश में कांग्रेस के पास एक सीट जीतने के लिए संख्या बल तो है, लेकिन उसके पास सिर्फ 6 अतिरिक्त वोट हैं। ऐसे में अगर क्रॉस-वोटिंग हो गई तो खेल बिगड़ जाएगा। संकट तब और बढ़ गया जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने दोबारा राज्यसभा जाने से इनकार कर दिया। अब कांग्रेस को ऐसे कद्दावर चेहरे को उतारना होगा जो कुनबे को एकजुट रख सके।
कर्नाटक में कांग्रेस मजबूत, राजस्थान में भाजपा
अगर कर्नाटक की बात करे तो कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की राज्यसभा में वापसी तय मानी जा रही है। कर्नाटक में कांग्रेस के पास मजबूत संख्या बल है, जिससे वह 3 सीटों पर अपनी जीत सुनिश्चित मानकर चल रही है। राजस्थान में भाजपा के खाते में 2 सीटें जाने की उम्मीद है, जबकि कांग्रेस को 1 सीट मिल सकती है। भाजपा की तरफ से रवनीत सिंह बिट्टू बड़े दावेदार हैं, तो कांग्रेस पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत या प्रवक्ता पवन खेड़ा के नाम हैं।
गुजरात में पहली बार कांग्रेस का शून्य
इस चुनाव में कांग्रेस के लिए गुजरात मुश्किल है। गुजरात से कांग्रेस के एकमात्र राज्यसभा सांसद शक्तिसिंह गोहिल का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। गुजरात में राज्यसभा सीट जीतने के लिए कम से कम 46 विधायकों के समर्थन की जरूरत है, लेकिन विधानसभा में कांग्रेस के पास महज 12 विधायक हैं। इतिहास में पहली बार ऐसा होने जा रहा है जब राज्यसभा में गुजरात से कांग्रेस का एक भी प्रतिनिधि नहीं होगा।
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