
सोनीपत। नगर निगम चुनाव 2026 से पहले कांग्रेस में अंदरूनी कलह सामने आ रही है। पार्षद उम्मीदवारों के टिकट कटने के बाद इसमें में सौदेबाजी, रिश्तेदारी, फर्जी सर्वे और पैसों के खेल के आरोप लग रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि स्थिति नहीं संभली तो कांग्रेस को दोहरे मोर्चे पर लड़ना पड़ेगा और इसका सीधा लाभ भाजपा को मिल सकता है। महिला विंग की प्रदेश महासचिव संतोष कादियान और नेता सतबीर निर्माण सहित कई नेताओं ने जिला अध्यक्ष और मेयर उम्मीदवार कमल दीवान तथा सह प्रभारी जितेंद्र बघेल पर पैसे लेकर टिकट देने के आरोप लगाए। टिकट नहीं मिलने से नाराज कार्यकर्ताओं ने कमजोर उम्मीदवार उतारने और भाजपा से मिलीभगत तक की बात कही। इन आरोपों से चुनाव से पहले कांग्रेस की साख पर सवाल उठे हैं।
वार्ड नंबर पांच से टिकट की दावेदार संतोष कादियान ने कमल दीवान को गद्दार बताते हुए पूर्व विधायक सुरेंद्र पवार पर भी आरोप लगाए। उनका कहना है कि एक सप्ताह पहले कमल दीवान की भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बडौली से मुलाकात हुई थी और कमजोर उम्मीदवार उतारने पर सहमति बनी। संतोष कादियान ने कहा कि बिना सौदेबाजी कोई काम नहीं होता और मेयर उपचुनाव हारने के बाद भी टिकट देना बड़ी गलती है। उन्होंने दावा किया कि वार्ड सर्वे के नाम पर 20 लाख रुपये तक की मांग की गई और पैसे नहीं देने पर उनकी टिकट काट दी गई।
संतोष कादियान ने पार्षद टिकटों में पंजाबी वर्ग को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया। पायल मलिक को रिश्तेदारी के आधार पर टिकट देने की बात कही और अपनी 15 साल की मेहनत नजरअंदाज होने का दावा किया। सतबीर निर्माण ने कहा कि 22 वार्ड की टिकट पैसों में बेची गईं। उनके अनुसार उनके बेटे की टिकट काटकर ऐसे व्यक्ति को टिकट दी गई जो पार्टी का सदस्य तक नहीं था। उन्होंने भूपेंद्र हुड्डा और दीपेंद्र हुड्डा पर भी गंभीर आरोप लगाए और कहा कि इस बार कमल दीवान 50 हजार वोटों से हारेंगे।
वार्ड नंबर सत्रह से दावेदारी करने वाले कुलदीप खासा और पवन कुमार ने भी टिकट काटे जाने पर निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा की। बागी नेताओं ने कांग्रेस के खिलाफ प्रचार करने की चेतावनी दी और कहा कि पार्टी के भीतर से ही भाजपा को मदद मिल रही है। दूसरी ओर कमल दीवान ने सभी आरोपों को झूठा और बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने टिकट से पहले ग्राउंड सर्वे कराया था और साफ छवि वाले उम्मीदवार चुने गए। उनका कहना है कि जिन पर आपराधिक मामले थे या जिनकी क्षेत्र में पकड़ कमजोर थी, उन्हें टिकट नहीं दी गई।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कुछ नेताओं का क्षेत्र में निवास नहीं होने और कई के खिलाफ मामले लंबित होने के कारण टिकट नहीं दी गई। वहीं पूर्व डिप्टी मेयर मनजीत गहलावत पर भी पद पर रहते हुए अपहरण का केस दर्ज होने का जिक्र किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस को जल्द संगठनात्मक नुकसान रोकना होगा, वरना चुनाव में इसका असर दिख सकता है।
Also Read :
Also Read :
Also Read :
मेष: दिन शुभ रहेगा...