Last Updated: September 26, 2026

Dainik Savera Times Logo

Right To Disconnect Bill 2025: ऑफिस के बाद अब नहीं रिसीव करना पड़ेगा बॉस का कॉल, संसद में आया नया बिल

December 7, 2025

Right To Disconnect Bill 2025: ऑफिस के बाद अब नहीं रिसीव करना पड़ेगा बॉस का कॉल, संसद में आया नया बिल

नेशनल डेस्क: गुरुग्राम के एक कॉर्पोरेट ऑफिस में काम करने वाले राजीव की कहानी आज करोड़ों कर्मचारियों की हकीकत बन चुकी है। राजीव एक दिन ऑफिस से घर लौटे तो तबीयत ठीक नहीं थी। उन्होंने फोन साइलेंट कर दिया और सो गए। अगले दिन ऑफिस में बॉस ने उन्हें डांट दिया कि उन्होंने पिछली रात फोन क्यों नहीं उठाया। राजीव अपनी तबीयत के बारे में समझा भी नहीं पाए। ऐसी स्थिति आज ज्यादातर कंपनियों में देखने को मिल रही है, जहाँ कर्मचारियों से उम्मीद की जाती है कि वे ऑफिस टाइम खत्म होने के बाद भी फोन उठाएँ और काम करें। इससे कर्मचारियों की निजी जिंदगी और ऑफिस के बीच का संतुलन बिगड़ता जा रहा है और सेहत पर भी असर पड़ रहा है। इसी समस्या को हल करने के लिए लोकसभा में ‘राइट टू डिस्कनेक्ट बिल 2025’ पेश किया गया है।

क्या है ‘राइट टू डिस्कनेक्ट बिल’?

‘राइट टू डिस्कनेक्ट’ यानी काम खत्म होने के बाद ऑफिस के इलेक्ट्रॉनिक संपर्क से दूर रहने का अधिकार। बिल में कहा गया है कि ऑफिस टाइम के बाद बॉस फोन करे तो कर्मचारी को फोन उठाने की कोई मजबूरी नहीं होगी। छुट्टी के दिन या घर पर किसी ईमेल का जवाब देना लाजमी नहीं होगा। कर्मचारी अगर कॉल या ईमेल का जवाब नहीं देता, तो उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकेगी। अगर कोई कंपनी या बॉस कर्मचारी पर दबाव डालता है या उसे मजबूर करता है, तो कंपनी पर जुर्माना लगाया जाएगा। बिल के अनुसार, नॉन-कम्प्लायंस की स्थिति में संस्था पर कर्मचारियों के कुल वेतन का 1% जुर्माना लगाया जा सकता है।

क्या है बिल का मकसद?

यह बिल सुप्रिया सुले (एनसीपी सांसद) द्वारा लोकसभा में पेश किया गया है। बिल का मुख्य उद्देश्य भारत में काम करने वाले लोगों को वर्क-लाइफ बैलेंस देना है। डिजिटल तकनीक ने काम को आसान तो बनाया है, लेकिन इसके कारण कर्मचारी ऑफिस के बाद भी लगातार जुड़े रहते हैं, जिससे मानसिक दबाव बढ़ रहा है।

ये भी पढ़ें: Earthquake: अलास्का-कनाडा में लगे भूकंप के झटके, 7.0 दर्ज की गई तीव्रता

सुप्रिया सुले का कहना है कि तकनीक की वजह से प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ की सीमाएँ धुंधली हो गई हैं और इसका सीधा प्रभाव कर्मचारियों की मानसिक और शारीरिक सेहत पर पड़ता है।

यह एक प्राइवेट मेंबर बिल है। अभी इसे केवल लोकसभा में पेश किया गया है। अगर लोकसभा इसे मंजूरी देती है, तभी यह राज्यसभा में जाएगा, लेकिन इसके पास होने की संभावना फिलहाल कम मानी जा रही है।

खबरें और भी हैं...

Copyright © 2025 Dainik Savera Times. All rights reserved.
ऐप खोलें