Last Updated: October 14, 2026

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RSS प्रमुख मोहन भागवत आज से 10 दिवसीय बंगाल दौरे पर, जानें पूरा कार्यक्रम

February 6, 2025

RSS प्रमुख मोहन भागवत आज से 10 दिवसीय बंगाल दौरे पर, जानें पूरा कार्यक्रम

RSS chief Mohan Bhagwat : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत गुरुवार से पश्चिम बंगाल के दौरे पर रहेंगे। यहां वह संगठनात्मक मुद्दों और संगठन के भविष्य पर पदाधिकारियों संग विचार मंथन करेंगे।

नेताओं ने बताया कि कोलकाता में पहले पांच दिनों के दौरान भागवत आरएसएस नेताओं और स्थानीय लोगों संग बैठक करेंगे। बैठक में संगठन के ढांचे को मजबूत करने और इसकी परिचालन सफलता सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

11 फरवरी को भागवत दक्षिण बंगाल के जिलों का दौरा फिर से शुरू करने से पहले एक ब्रेक लेंगे।

आरएसएस के एक नेता ने कहा, ‘भागवत बर्धमान सहित कई जिलों का दौरा करेंगे, जहां 16 फरवरी को उनकी एकमात्र रैली होने की उम्मीद है। वे क्षेत्रीय आरएसएस नेताओं, स्थानीय कार्यकर्ताओं और बर्धमान और आसपास के क्षेत्रों के प्रमुख लोगों से भी मिलेंगे।‘

उन्होंने कहा, ‘इन बैठकों में संगठनात्मक विकास, सामुदायिक आउटरीच, आरएसएस नेतृत्व और स्थानीय हितधारकों के बीच संबंधों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करने की उम्मीद है।‘

उनकी यात्र देशभक्ति, आत्मनिर्भरता, पारिवारिक मूल्यों, पर्यावरण संरक्षण और परिवार-उन्मुख प्रथाओं के माध्यम से समाजीकरण जैसे मूल्यों को स्थापित करने पर केंद्रित होगी।

आरएसएस महासचिव जिष्णु बसु के अनुसार, भागवत केरल से राज्य में आएंगे। बसु ने कहा, ‘7-10 फरवरी तक भागवत दक्षिण बंग क्षेत्र में आरएसएस पदाधिकारियों से बातचीत करेंगे, जिसमें पूर्व-पश्चिम मेदिनीपुर, हावड़ा, कोलकाता और उत्तर-दक्षिण 24 परगना शामिल हैं। 13 फरवरी को वह मध्यबंग क्षेत्र में जाएंगे, जिसमें बांकुरा, पुरुलिया, बीरभूम, पूर्व-पश्चिम बर्धमान और नादिया जैसे क्षेत्र शामिल हैं।‘

यात्र के एक महत्वपूर्ण हिस्से में भागवत की 11-12 फरवरी को विचार-मंथन सत्र में भागीदारी शामिल है। इसके बाद 14 फरवरी को मध्यबंग में एक नए आरएसएस कार्यालय का उद्घाटन होगा।

भागवत 16 फरवरी को बर्धमान के एसएआई परिसर में आरएसएस पदाधिकारियों के एक सम्मेलन में भी भाग लेंगे।

बसु ने बताया कि भागवत की यात्र का उद्देश्य हिंदू समुदाय के अंदर राष्ट्रवाद की भावना को बढ़ावा देना, स्वदेशी चेतना को बढ़ावा देना और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाना है, जो एक प्रमुख राष्ट्रीय लक्ष्य है।

उन्होंने कहा कि आरएसएस प्रचारक इन संदेशों के अनुरूप पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और देशभक्ति को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को साकार करते हुए देश आत्मनिर्भर भारत बनेगा और हर प्रचारक उस लक्ष्य को साकार करने के लिए काम करेगा। हर प्रचारक पौधों की रक्षा के लिए काम करेगा, हर प्रचारक पर्यावरण को बेहतर बनाने और आसपास की सफाई करने, दूसरों को सार्वजनिक स्थानों पर थूकने के लिए मना करने की दिशा में काम करेगा। हम इन संदेशों को लोगों तक पहुंचाने के तरीकों पर भागवत जी से दिशा-निर्देश मांगेंगे।‘

यात्र के राजनीतिक महत्व के बारे में सवालों का जवाब देते हुए, बसु ने स्पष्ट किया कि आरएसएस एक राजनीतिक संगठन नहीं है। उन्होंने कहा कि यात्र और संबंधित बैठकें, जिन्हें आरएसएस शब्दावली में प्रभास कहा जाता है, पहले से ही योजनाबद्ध थीं और उनका उद्देश्य विशेष रूप से आगामी 2026 के राज्य विधानसभा चुनावों को प्रभावित करना नहीं था।

भागवत राज्य में शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में आरएसएस के प्रदर्शन का भी आकलन करेंगे। राजनीतिक वेिषकों का कहना है कि भाजपा की चुनावी रणनीतियों में आरएसएस की अहम भूमिका रही है और भागवत के दौरे को आगामी विधानसभा चुनावों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

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