नेशनल डेस्कः ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले को लगभग 20 दिन हो चुके हैं। इस संघर्ष के कारण पूरी दुनिया में अस्थिरता बढ़ गई है। खासकर पेट्रोल, डीजल और गैस जैसी ऊर्जा जरूरतों को लेकर कई देशों में चिंता का माहौल है। ईरान ने अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से ज्यादा टोल वसूलने की योजना बनाई है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। अगर यहां टोल बढ़ता है, तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतों पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से कई देश परेशान और सतर्क हैं।
आरएसएस प्रमुख का आया बयान
इसी बीच मोहन भागवत का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि जहां दुनिया संकट में है, वहीं भारत लगातार आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया विनाश की तरफ बढ़ रही है और युद्ध की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। उनके मुताबिक, इस स्थिति को खत्म करने में भारत की बड़ी भूमिका हो सकती है।
नागपुर में कार्यक्रम के दौरान किया संबोधन
मोहन भागवत नागपुर में विश्व हिंदू परिषद के विदर्भ प्रांत के कार्यालय के शिलान्यास कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। उन्होंने कहा कि आज दुनिया में कोई ऐसा तत्व नहीं है जो सभी को जोड़ सके, लेकिन भारत के पास यह क्षमता है। उनके अनुसार, भारत के पास ऐसी सोच और परिस्थितियां हैं जो पूरी दुनिया को एक साथ ला सकती हैं।
युद्ध और संघर्ष की वजह
भागवत ने कहा कि दुनिया में जो युद्ध हो रहे हैं, उनकी मुख्य वजह स्वार्थ है। लोग और देश वर्चस्व (दबदबा) स्थापित करने के लिए लड़ रहे हैं। उन्होंने इसे सरल शब्दों में समझाते हुए कहा कि “अगर मेरे पास कुछ नहीं है, तो मैं दूसरे से लेकर आऊंगा”-यही सोच संघर्ष को बढ़ा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया में अभी भी झगड़े खत्म नहीं हुए, धर्म परिवर्तन (कन्वर्जन) जारी है। ऊंच-नीच और भेदभाव खत्म नहीं हुआ। इसी कारण दुनिया विनाश की ओर बढ़ रही है।
भारत की भूमिका पर जोर
मोहन भागवत ने कहा कि पूरी दुनिया एक तरह से बिखरी हुई है, लेकिन भारत के पास लोगों को जोड़कर रखने की ताकत है। उनका मानना है कि भारत ही ऐसा देश है जो दुनिया में संतुलन और शांति ला सकता है।
शक्ति और कानून पर विचार
उन्होंने यह भी कहा कि बिना शक्ति के कोई किसी की बात नहीं मानता। उनके अनुसार भारत इंसानियत और कानून के आधार पर चलता है। जबकि दुनिया के कई हिस्सों में “जंगल का कानून” चलता है। हालांकि, उन्होंने अपने भाषण में किसी भी देश या नेता का नाम नहीं लिया।

