
Business News: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया इस हफ्ते ऐतिहासिक गिरावट का सामना कर रहा है। बता दें कि बुधवार को रुपया पहली बार 90 के स्तर से नीचे फिसलकर अपने ऑल-टाइम लो 90.46 पर पहुंच गया। विदेशी बाजारों में डॉलर की बढ़ती मांग, एफपीआई की लगातार बिकवाली और भारत-अमेरिका ट्रेड डील में देरी जैसे कारकों ने रुपये पर दबाव बढ़ाया है।
इसी बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रुपये की कमजोरी पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत स्थिति को देखते हुए मुद्रा अपना “नेचुरल पाथ” खुद ढूंढ़ लेगी।
“पुरानी परिस्थितियों से तुलना करना गलत”: वित्त मंत्री
हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट 2024 में बोलते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि करेंसी वेल्यू पर बहस करते समय देश की वर्तमान आर्थिक स्थिति को आधार बनाना चाहिए। उन्होंने कहा, “रुपये को अपना रास्ता खुद ढूंढ़ना होगा। करेंसी को पिछली घटनाओं से जोड़कर देखने के बजाय मौजूदा आर्थिक वास्तविकताओं को समझना चाहिए।” सीतारमण ने यह भी कहा कि भारत की ग्रोथ रफ्तार और मजबूत फंडामेंटल्स रुपये में आई अस्थिरता को संभालने में मदद करेंगे।
कमजोर रुपया, एक्सपोर्टर्स को राहत- लेकिन तस्वीर इससे बड़ी है
वित्त मंत्री ने मान्यता दी कि कमजोर रुपये से निर्यातकों को कुछ हद तक फायदा मिल सकता है, खासकर ऐसे समय में जब अमेरिकी शुल्क नीतियों से कारोबार प्रभावित रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि केवल यही कारण रुपये की चाल को परिभाषित नहीं करता। सीतारमण ने कहा, “किसी भी मुद्रा के मूल्यांकन में सिर्फ एक्सपोर्ट्स नहीं, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था की मजबूती को भी शामिल किया जाना चाहिए।”
महंगाई रिकॉर्ड लो, ग्रोथ ऊंचाई पर फिर भी रुपये पर दबाव क्यों?
रुचिकर यह है कि रुपये की गिरावट ऐसे समय हो रही है जब GDP ग्रोथ दूसरी तिमाही में छह तिमाहियों के उच्चतम स्तर 8.2% पर है। रिटेल महंगाई (CPI) अक्टूबर में ऐतिहासिक रूप से कम 0.25% पर आ गई। घरेलू मांग और निवेश दोनों मजबूत बने हुए हैं। इसके बावजूद डॉलर की वैश्विक मजबूती और विदेशी पूंजी का भारत से बाहर जाना रुपये को स्थिर नहीं रहने दे रहा।
ये भी पढ़ें: Seema Haider Pregnancy: सचिन के घर जल्द गूंजे की किलकारी, फिर प्रेग्नेंट हुई सीमा हैदर
FY26 में 7% या उससे अधिक की ग्रोथ का अनुमान
वित्त मंत्री ने भरोसा जताया कि आने वाले महीनों में भारत की आर्थिक गतिविधि मजबूत बनी रहेगी। उन्होंने संकेत दिया कि FY26 में देश की GDP ग्रोथ 7% या उससे अधिक रहने की पूरी संभावना है। सरकार का मानना है कि मजबूत उपभोग, कैपेक्स में तेजी और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश भारतीय अर्थव्यवस्था को गति देते रहेंगे।