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शेख हसीना को लेकर 24 घंटे में आएगा बड़ा फैसला, बांग्लादेश में बढ़ी सुरक्षा

ढाका: बांग्लादेश की राजनीति में अगले 24 घंटे बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं। बता दें कि देश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ चल रहे विशेष ट्रिब्यूनल का फैसला सोमवार को आने वाला है, जिससे न केवल उनके भविष्य बल्कि पूरे देश की सुरक्षा स्थिति पर भी असर पड़ सकता है।

यूनुस सरकार ने अदालत से शेख हसीना को मृत्युदंड देने की मांग की है। इसे देखते हुए बांग्लादेश में सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।

ट्रिब्यूनल में क्या है मामला?

शेख हसीना और उनके सहयोगियों पर पिछले साल हुए एंटी-गवर्नमेंट प्रदर्शनों के दौरान मानवता के खिलाफ अपराध करने का आरोप है। इस मामले में हसीना के अलावा उनके गृह मंत्री आसदुज्जमान खान कमाल और तत्कालीन पुलिस महानिदेशक चौधरी अब्दुल्लाह अल-मामून भी आरोपी हैं।

खास बात यह है कि पूर्व पुलिस महानिदेशक अब्दुल्लाह अल-मामून इस मामले में सरकारी गवाह बन चुके हैं। उनके बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर ट्रिब्यूनल ने पिछले महीने मामले की सुनवाई पूरी की थी, जिसमें कुल 54 गवाहों ने गवाही दी।

आरोप और समर्थन

मुख्य अभियोजक मोहम्मद ताजुल इस्लाम ने हसीना के लिए मृत्युदंड की मांग की है, उनका कहना है कि हसीना बड़े पैमाने पर प्रदर्शनों के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों की मुख्य “मास्टरमाइंड” थीं। दूसरी ओर, हसीना और उनके समर्थक इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार देते हैं और कहते हैं कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह से पक्षपाती हैं।

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राजनीतिक और अंतर्राष्ट्रीय पहलू

शेख हसीना फिलहाल भारत में सुरक्षित हैं, और यूनुस सरकार ने उनकी प्रत्यर्पण की मांग की है। भारत ने अब तक इस अनुरोध पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। Meanwhile, अवामी लीग ने अंतरराष्ट्रीय अदालतों में यूनुस सरकार के खिलाफ याचिकाएं दाखिल की हैं, जिसमें मानवाधिकार उल्लंघनों और मनमाने गिरफ्तारी के आरोप शामिल हैं।

सुरक्षा व्यवस्था

देश में बड़े पैमाने पर अशांति और हिंसा की आशंका के चलते सुरक्षा एजेंसियों ने राजधानी ढाका और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में कड़ी सतर्कता बरती है। ट्रिब्यूनल के फैसले के तुरंत बाद संभावित विरोध प्रदर्शनों और सार्वजनिक उथल-पुथल से निपटने के लिए तैयारी पूरी कर ली गई है। बांग्लादेश के राजनीतिक परिदृश्य में यह फैसला ऐतिहासिक और संवेदनशील माना जा रहा है। अगले 24 घंटे में आने वाला परिणाम देश की राजनीति और सामाजिक स्थिरता पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।

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