small house and temple together : नई दिल्ली। कई भारतीय हिंदू घरों में मंदिर होता ही है। एक शांत और पवित्र स्थान जहां घर के लोग रोजाना सुबह और शाम पूजा-पाठ करते हैं, लेकिन कई बार छोटे घरों में मंदिर उसी कमरे में रहते हैं, जहां परिवार के सदस्य आपस में बैठकर बातचीत या खाना खाते हैं।
मन में आते हैं ये सवाल
इससे कई लोगों के मन में एक सवाल बार-बार उठता है कि क्या मंदिर वाले कमरे में खाना खाना सही रहता है? आइए जानते हैं इसके बारे में। सनातन परंपरा के मुताबिक, घर के मंदिर को हमेशा साफ और पवित्र रखना बेहद जरूरी है। भोजन करना दैनिक क्रिया का अहम हिस्सा है, लेकिन भोजन खाना या पकाने का मतलब है गंध, आवाज और कभी-कभी गंदगी। इसी कारण से कुछ लोगों को लगता है कि मंदिर के पास खाना खाने से शांति भंग हो सकती है।
कमरे में खाना गलत बात नहीं
अगर आपका घर छोटा है और आप घर और मंदिर को साफ रखते हैं, तो उसी कमरे में खाना खाना कोई गलत बात नहीं है। कई धार्मिक गुरु और पुजारी बताते हैं कि, पवित्रता इस बात से झलकती है कि आप उस स्थान के साथ कैसा व्यवहार करते है, न सिर्फ उस की जगह से। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में मंदिर स्थापित करने के कुछ दिशा-निर्देशों को मानना बेहद जरूरी है। घर में मंदिर शांत और स्वच्छ होने के साथ ऐसी जगह होनी चाहिए, जहां शोर कम हो। भूलकर भी स्नानघर या शोरगुल वाली जगहों पर मंदिर का निर्माण नहीं कराना चाहिए।
वातावरण होना चाहिए एकदम शांत
मंदिर का वातावरण हमेशा शांत और पवित्र होना चाहिए। वास्तु शास्त्र में यह नहीं कहा गया है कि, एक ही कमरे में खाना खाना वर्जित है, लेकिन रूम के अंदर कुछ दूरी बनाए रखने का सुझाव जरूर देता है। अगर आपका घर छोटा है और एक ही रूम में मंदिर भी है, तो आप मंदिर को दीवार पर थोड़ा ऊपर रख सकते हैं। मंदिर के दूसरी तरफ भोजन कर सकते हैं। ऐसा करने से दोनों स्थान की पवित्रता भंग नहीं होगी और एक रूम में भोजन भी कर सकेंगे।
हमेशा रखें ये ध्यान
भारत में कई ऐसे परिवार हैं, जिनके पास अतिरिक्त कमरे नहीं होते हैं। ऐसे में अगर साफ-सफाई का ध्यान दिया जाए तो एक ही कमरे में भोजन करना सही रहेगा। इसके लिए आप कुछ खास उपाय अजमा सकते हैं।
- पूजा होने के बाद मंदिर को पर्दे से ढक दें।
- घर में मंदिर के ठीक सामने बैठकर खाने से बचें।
यह सरल उपाय संतुलन बनाए रखने में काफी मदद करते हैं। आपको इस बात का खास ध्यान देना होगा कि मंदिर का क्षेत्र साफ-सुथरा हो। इसके अलावा भोजन करने की जगह और प्रार्थना क्षेत्र के बीच अच्छी खासी दूरी हो। ये छोटी-छोटी आदतें मंदिर की शांति को बनाए रखने में मदद निभाती है।
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