
Sonam Wangchuk begins fast unto death : नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन ने रविवार को नया और निर्णायक मोड़ ले लिया। पर्यावरण कार्यकर्ता Sonam Wangchuk ने छात्र नेताओं और आंदोलनकारियों के साथ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। अनशन शुरू करने से पहले वांगचुक और आंदोलन से जुड़े अन्य नेताओं ने राजघाट पहुंचकर राष्ट्रपिता Mahatma Gandhi को श्रद्धांजलि अर्पित की। वांगचुक ने कहा कि वह खुशी से नहीं, बल्कि मजबूरी में अनशन पर बैठे हैं और यह कदम जनता की आवाज़ को मजबूती देने के लिए उठाया गया है।
इसके बाद वे सभी जंतर-मंतर पहुंचे और भूख हड़ताल की शुरुआत की। इस दौरान किसान संगठनों, खाप पंचायतों और बड़ी संख्या में छात्रों ने भी आंदोलन को समर्थन दिया। भूख हड़ताल शुरू करने से पहले आंदोलनकारी राजघाट पहुंचे और महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद जंतर-मंतर पहुंचकर सोनम वांगचुक और छह छात्र नेताओं ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह संघर्ष शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को खत्म करने और नई शिक्षा नीति (NEP 2020) को वापस लेने की मांग को लेकर किया जा रहा है।
भूख हड़ताल शुरू करते हुए सोनम वांगचुक ने कहा कि जिनेवा से सीधे दिल्ली पहुंचा हूं। पहले ही संदेश दिया था कि अगर शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो लोकतांत्रिक तरीके से शांतिपूर्ण प्रतिरोध करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि मैं खुशी से नहीं, मजबूरी में अनशन पर बैठ रहा हूं। सोनम वांगचुक ने कहा कि शिक्षा मेरे जीवन का सबसे बड़ा मिशन रहा है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बावजूद कभी इंजीनियर की नौकरी नहीं की। देश की अधिकांश समस्याओं का समाधान शिक्षा सुधार से ही निकलेगा। जब युवाओं और छात्रों ने शिक्षा व्यवस्था में गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज उठाई, तो चुप रहना संभव नहीं था। इसी वजह से कॉकरोच जनता पार्टी में आंदोलन का हिस्सा बना हूं। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल बच्चों का भविष्य नहीं बनाती, बल्कि देश की दिशा तय करती है।
उन्होंने कहा कि हिमालय और लद्दाख का पर्यावरण पूरे देश की साझा जिम्मेदारी है, क्योंकि करोड़ों लोग वहां से निकलने वाले जल स्रोतों पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि अगर सांस लेने के लिए स्वच्छ हवा और पीने के लिए साफ पानी चाहिए, तो पर्यावरण के सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इन दोनों मुद्दों पर सरकार की चुप्पी ने मुझे अनशन पर बैठने के लिए मजबूर किया है। भीषण गर्मी के बावजूद हजारों लोग आंदोलन में शामिल हैं। इतनी कठिन परिस्थितियों में भी छात्रों और नागरिकों का संघर्ष लोकतंत्र में जनता की ताकत को दिखाता है।
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि यह भूख हड़ताल उन 20 से अधिक छात्रों को न्याय दिलाने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू की गई है। भारतीय किसान यूनियन और कई खाप पंचायतों ने आंदोलन को समर्थन दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जंतर मतर पर आने के दौरान 500 से अधिक किसानों को नजरबंद किया गया, ताकि वे यहां न पहुंच सकें। अब आंदोलन कब तक चलेगा, यह पूरी तरह सरकार के रुख पर निर्भर करेगा। छह छात्र नेताओं ने भी शुरू किया भूख हड़ताल: सोनम वांगचुक के आह्वान पर छह छात्र नेताओं ने भी भूख हड़ताल शुरू की।
इनमें AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा, जेएनयू छात्रसंघ के संयुक्त सचिव दानिश अली, AISA उत्तर प्रदेश अध्यक्ष मनीष, AISA दिल्ली विश्वविद्यालय उपाध्यक्ष दीपक, जेएनयू बराक हॉस्टल के अध्यक्ष हृषिकेश और अंबेडकर विश्वविद्यालय छात्र परिषद के पूर्व सीसी सदस्य आमीन ने भूख हड़ताल शुरू की। उन्होंने कहा कि वे धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, NTA को खत्म करने और नई शिक्षा नीति को वापस लेने की मांग पूरी होने तक सोनम वांगचुक के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष करेंगे।
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