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Haryana News : आध्यात्मिक विकास निष्काम भाव से कर्त्तव्य निर्वहन में : प्रो.असीम

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चंडीगढ़। हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने कहा कि आध्यात्मिक विकास संसार से दूर जाने में नहीं, बल्कि सजग होकर इसमें सक्रिय भागीदारी करने और निष्काम भाव से अपने कर्त्तव्यों के निर्वहन में है।

दो पुस्तकों का विमोचन

राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने यह बात आज लोक भवन हरियाणा में उनके निजी सचिव शंख चटर्जी की लिखित दो पुस्तकों ‘अद्वैत वेदांत-एक अनोखा दर्शन’ और ‘सामाजिक दृष्टिकोण में धर्मक्षेत्र-कुरुक्षेत्र’ का विमोचन करते हुए कही। राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने कहा कि अद्वैत वेदांत और कुरुक्षेत्र, जिसे धर्मक्षेत्र के रूप में पूजनीय माना जाता है, दोनों ही मानवता के आध्यात्मिक विकास के बारे में गहन अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं।

बोले- यहां श्रीकृष्ण दे चुके गीता का ज्ञान

अद्वैत वेदांत, जिसे आदि शंकराचार्य ने स्पष्ट रूप से प्रतिपादित किया, हमें सिखाता है कि व्यक्तिगत आत्मा और सार्वभौमिक चेतना एक ही हैं। यह अलगाव के भ्रम को समाप्त कर साधक को आत्म-साक्षात्कार और आंतरिक मुक्ति की ओर मार्गदर्शन करता है। कुरुक्षेत्र, जो महाभारत के भीतर भगवद्गीता का पवित्र युद्धक्षेत्र है, मानव जीवन में निहित नैतिक और आध्यात्मिक संघर्ष का प्रतीक है। यहीं भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को शाश्वत ज्ञान प्रदान किया और उन्हें धर्म, वैराग्य और स्पष्ट उद्देश्य के साथ कर्म करने के लिए प्रेरित किया।

सत्य दिखाता है अद्वैत वेदांत

उन्होंने कहा कि यह पुस्तकें न केवल बौद्धिक विमर्श को समृद्ध करंेगी, बल्कि पाठकों को जीवन, कर्तव्य और आध्यात्मिक समझ के गहरे आयामों पर विचार करने के लिए प्रेरित भी करेंगी। अद्वैत वेदांत एकत्व के दार्शनिक सत्य को प्रस्तुत करता है, जबकि कुरुक्षेत्र वह व्यावहारिक मंच है जहाँ इस सत्य को कर्म के माध्यम से साकार करना होता है।

चटर्जी की बुद्धिमता की सराहना

राज्यपाल ने पुस्तकों के लेखक और अपने निजी सचिव शंख चटर्जी की बुद्धिमता, समर्पण और सरल व्यवहार की सराहना करते हुए उन्हें एक बहुआयामी व्यक्तित्व का धनी बताया। उन्होंने कहा कि शंख चटर्जी ने अपने माता-पिता से एक समावेशी बौद्धिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण विरासत में पाया है, जो उनके विचारों और विशेष रूप से आध्यात्मिक विषयों को देखने के उनके नजरिए को समृद्ध बनाता है।

पुस्तकें करती हैं दृष्टिकोण स्पष्ट : हरविंद्र कल्याण

हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने कहा कि पुस्तकें हमें जीवन के उद्देश्य के प्रति हमारे दृष्टिकोण को स्पष्ट करती हैं। पुस्तकें ही हमें जीवन जीने की कला सीखाती हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जिस विकसित राष्ट्र की कल्पना करते हैं और जिस संकल्प के साथ आगे बढ़ने की बात करते हैं वह शंख चटर्जी जैसे सृजनशील युवाओं के माध्यम से ही संभव होगी। उन्होंने कहा कि आज राष्ट्र के लिए प्राचीन संस्कृति और नवीन सोच को साथ लेकर चलने वाले युवाओं की बहुत आवश्यकता है।

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