Last Updated: September 23, 2026

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TARA का सफल परीक्षण, जानें क्या है भारत का पहला स्वदेशी ग्लाइड वेपन सिस्टम

May 8, 2026

TARA का सफल परीक्षण, जानें क्या है भारत का पहला स्वदेशी ग्लाइड वेपन सिस्टम

नेशनल डेस्क: भारत ने रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। देश में विकसित किए गए स्वदेशी ग्लाइड वेपन सिस्टम टैक्टिकल एडवांस्ड रेंज ऑग्मेंटेशन (TARA) का पहला सफल परीक्षण किया गया। यह परीक्षण ओडिशा तट के पास गुरुवार को भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और भारतीय वायुसेना (IAF) ने मिलकर किया।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह प्रणाली भारत की प्रिसिजन स्ट्राइक यानी बेहद सटीक हमले करने की क्षमता को मजबूत करेगी। यह उपलब्धि देश को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

क्या है TARA सिस्टम?

TARA भारत का पहला स्वदेशी ग्लाइड वेपन सिस्टम है। इसे खासतौर पर ऐसे पारंपरिक बमों और वारहेड्स को आधुनिक तकनीक से लैस करने के लिए तैयार किया गया है, जिनमें पहले दिशा-निर्देशन की सुविधा नहीं होती थी। इस नई प्रणाली की मदद से सामान्य हथियार भी अब लंबी दूरी तक जाकर बेहद सटीक तरीके से लक्ष्य को निशाना बना सकेंगे। सरल शब्दों में समझें तो यह तकनीक पुराने और कम लागत वाले हथियारों को आधुनिक ‘स्मार्ट वेपन’ में बदल देती है।

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कैसे काम करता है ग्लाइड वेपन सिस्टम?

ग्लाइड वेपन सिस्टम में बमों को विशेष गाइडेंस तकनीक और नियंत्रण प्रणाली से जोड़ा जाता है। इसके बाद ये हथियार हवा में लंबी दूरी तक ग्लाइड करते हुए तय लक्ष्य तक पहुंचते हैं। इससे हमले की सटीकता बढ़ती है और दुश्मन के ठिकानों को कम संसाधनों में अधिक प्रभावी तरीके से निशाना बनाया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की तकनीक आधुनिक युद्ध में काफी अहम मानी जाती है, क्योंकि इससे कम खर्च में अधिक प्रभावी हमला संभव हो पाता है।

किसने किया विकसित?

इस परियोजना को हैदराबाद स्थित डीआरडीओ की प्रमुख प्रयोगशाला रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) ने विकसित किया है। इसमें डीआरडीओ की अन्य प्रयोगशालाओं और कई उद्योग साझेदारों ने भी सहयोग दिया। वैज्ञानिकों ने इस प्रणाली को इस तरह डिजाइन किया है कि इसकी लागत कम रहे, लेकिन इसकी मारक क्षमता और सटीकता आधुनिक अंतरराष्ट्रीय हथियार प्रणालियों के बराबर हो।

परीक्षण में क्या देखा गया?

परीक्षण के दौरान सिस्टम की उड़ान क्षमता, लक्ष्य भेदन की सटीकता और तकनीकी प्रदर्शन का मूल्यांकन किया गया। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि सभी निर्धारित मानक पूरी तरह सफल रहे। इस सफल परीक्षण से यह साबित हुआ कि भारत अब अत्याधुनिक प्रिसिजन गाइडेड हथियारों के विकास में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

रक्षा मंत्री ने दी बधाई

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि पर डीआरडीओ, भारतीय वायुसेना और परियोजना से जुड़े सभी वैज्ञानिकों और उद्योग साझेदारों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि TARA का सफल परीक्षण भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता को और मजबूत करेगा तथा देश को रक्षा तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने में मदद देगा।

क्यों महत्वपूर्ण है यह उपलब्धि?

विशेषज्ञों के अनुसार, TARA जैसे सिस्टम भविष्य में भारतीय सशस्त्र बलों को कम लागत में अत्याधुनिक और सटीक हथियार उपलब्ध कराने में मदद करेंगे। इससे न केवल सेना की ताकत बढ़ेगी, बल्कि विदेशों पर निर्भरता भी कम होगी। भारत की ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत पहल को भी इससे नई मजबूती मिलेगी।

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