नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार, ईडी, सीबीआई और व्यवसायी अनिल अंबानी से उस जनहित याचिका पर जवाब मांगा है जिसमें रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) और संबद्ध कंपनियों द्वारा कथित बैंक रिण दुरुपयोग और बड़े पैमाने पर बैंक धोखाधड़ी की कोर्ट-मॉनिटरिंग में जांच की मांग की गई है। याचिका पूर्व सचिव ईएएस सरमा ने दायर की है, जिसमें इसे भारत की ‘सबसे बड़ी कॉपोर्रेट धोखाधड़ी’ बताया गया है। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायमूर्ति विनोद चंद्रन की पीठ ने सभी पक्षों को तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा।
याचिका में कहा गया कि 21 अगस्त, 2025 की सीबीआई एफआईआर और ईडी कार्रवाई कथित गड़बड़ी के केवल छोटे हिस्से तक सीमित है, जबकि फोरैंसिक ऑडिट में बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ सामने आई थीं। आरोप है कि 31,580 करोड़ रुपये का ऋण दूसरे भुगतान, संबंधित पक्षों को हस्तांतरण, फर्जी खातों और शेल कंपनियों के जरिए धनशोधन में गया। याचिका में यह भी कहा गया कि फोरैंसिक ऑडिट 2020 में जमा होने के बावजूद एसबीआई ने शिकायत 2025 में दर्ज की, जो संस्थागत मिलीभगत का संकेत है। सभी प्रतिवादियों के जवाब के बाद अगली सुनवाई होगी।
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