चंडीगढ़। शहरी स्थानीय निकाय विभाग और कर्मचारी संघ के बीच चल रही खींचतान लंबी चलने के आसार हैं। चंडीगढ़ में निकाय विभाग के उच्च अधिकारियों और कर्मचारी नेताओं में वार्ता बेनतीजा रही। इसके बाद प्रदेश के करीब 30 हजार निकाय कर्मचारी आज से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए।
जानें, क्यों वार्ता विफल होने के कारण
हरियाणा सर्व कर्मचारी संघ के राज्य प्रधान और नगर पालिका कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष नरेश शास्त्री के नेतृत्व में 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त एवं सचिव अशोक मीना के साथ मुलाकात की। वार्ता के दौरान कर्मचारियों ने अपनी मांगों को पुरजोर तरीके से रखा, लेकिन सरकार की ओर से कोई ठोस आश्वासन न मिलने के कारण सहमति नहीं बन सकी।
ये थी कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
सीवरेज से संबंधित ठेका कर्मचारियों को नियमित किया जाए। सीवरेज कार्य से जुड़े सभी ठेकों को तुरंत समाप्त किया जाए। सीवरेज कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन ₹30,000 निर्धारित हो। गुरुग्राम के 3,480 कर्मचारियों को वापस नौकरी पर रखा जाए और 26 आंदोलनकारी नेताओं की बर्खास्तगी रद्द हो।
ये रहा एसोसिएशन का रुख
बैठक के दौरान विभाग के सचिव अशोक मीना ने प्रदेश में चल रहे विशेष सफाई अभियान का हवाला देते हुए कर्मचारियों से हड़ताल वापस लेने की भावुक अपील की। हालांकि, कर्मचारी नेताओं ने इसे सिरे से नकार दिया। नगर पालिका कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष नरेश शास्त्री ने बताया कि हमें लंबे समय से केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं। अब हमारे पास आंदोलन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। जब तक मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, हड़ताल जारी रहेगी।
हड़ताल का आम आदमी पर असर तय
इस हड़ताल में सफाई कर्मचारी, सीवरेज कर्मी और अन्य निकाय कर्मचारी शामिल हैं, जिसके चलते प्रदेश के शहरों में सफाई व्यवस्था और सीवरेज प्रबंधन पूरी तरह ठप हो सकता है। वार्ता के दौरान निकाय विभाग के अतिरिक्त निदेशक वाईएस गुप्ता और कई दिग्गज कर्मचारी नेता भी मौजूद रहे।
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