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पूर्व टीएमसी विधायक के बीजेपी में शामिल होने पर पार्टी में बढ़ी तनातनी

September 4, 2023

पूर्व टीएमसी विधायक के बीजेपी में शामिल होने पर पार्टी में बढ़ी तनातनी

कोलकाता: पश्चिम बंगाल के धूपगुड़ी विधानसभा क्षेत्र से पूर्व तृणमूल कांग्रेस विधायक मिताली रॉय के भाजपा में शामिल होने के फैसले ने राज्य इकाई में असंतोष की लहर पैदा कर दी है। इस सीट पर 5 सितंबर को उपचुनाव होने हैं। मिताली रॉय को शामिल करने का विरोध करने वाले भाजपा नेताओं का तर्क यह है कि भाजपा के राज्य नेतृत्व ने 2021 के विधानसभा चुनावों के नतीजों से कोई सबक नहीं सीखा है। उस समय तृणमूल कांग्रेस के कई नेता चुनाव से पहले भगवा खेमे में शामिल हो गए थे और चुनाव के बाद सत्तारूढ़ दल (टीएमसी) में लौट गए थे। चुनाव के नतीजों में बीजेपी सरकार बनाने में असमर्थ रही थी।

इस मुद्दे पर सबसे स्पष्ट रूप से विरोध कूच बिहार के भाजपा जिला सचिव अजय साहा कर रहे हैं। उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट पर मिताली रॉय के पार्टी में शामिल होने पर अपनी शिकायतें खुलकर व्यक्त की हैं। उन्होंने सवाल किया किऐसा लगता है कि बीजेपी ने 2021 के राज्य विधानसभा चुनावों से कोई सबक नहीं सीखा है। चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस के कई नेता और विधायक बीजेपी में शामिल हो गए। उनमें से कई ने 2021 के चुनावों में भाजपा के लिए चुनाव लड़ा। लेकिन, फिर भी हम राज्य में सरकार नहीं बना सके। नतीजों के बाद वैसे नेता फिर से तृणमूल कांग्रेस में चले गए।

‘मिताली रॉय बीजेपी में शामिल हो गई क्योंकि उन्हें तृणमूल कांग्रेस में नजरअंदाज किया जा रहा था। वह खुद 2021 में बीजेपी उम्मीदवार से हार गईं। उनके शामिल होने से बीजेपी को कैसे फायदा हो सकता है?‘ अजय साहा ने यह भी कहा कि पार्टी में दल-बदलुओं को शामिल करने की इस प्रवृत्ति के कारण कई पुराने लोग या तो पार्टी छोड़ने या निष्क्रिय होने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। उन्होंने कहा किवे तृणमूल कांग्रेस के भ्रष्ट नेताओं को शामिल किए जाने से निराश हैं। राज्य नेतृत्व केंद्रीय नेतृत्व को महत्व दिलाने के लिए शॉर्टकट तरीका अपना रहा है और यह राज्य में पार्टी को बर्बाद कर रहा है।

दरअसल, 2016 से 2021 तक धूपगुड़ी से पार्टी की पूर्व विधायक मिताली रॉय ने 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भी उसी निर्वाचन क्षेत्र से सत्तारूढ़ दल की ओर से चुनाव लड़ा था। हालांकि, 2021 में वह भाजपा के बिष्णु पद रॉय से हार गईं जिनकी हाल ही में मृत्यु हो गई, जिससे निर्वाचन क्षेत्र के लिए उपचुनाव हो रहा है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने कहा कि हालांकि मिताली रॉय उपचुनाव में दोबारा नामांकन की उम्मीद कर रही थी। लेकिन, वह इस बात से नाखुश थी कि सत्ताधारी पार्टी ने उन्हें दोबारा नामांकित करने के बजाय इस सीट के लिए धूपगुड़ी गर्ल्स कॉलेज के प्रोफेसर निर्मल चंद्र रॉय को मैदान में उतारा।

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