Last Updated: November 5, 2026

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केंद्र सरकार लेकर आ रही नया कानून, अब लोकसभा में 543 की जगह होंगी 850 सीटें

April 15, 2026

केंद्र सरकार लेकर आ रही नया कानून, अब लोकसभा में 543 की जगह होंगी 850 सीटें

नेशनल डेस्क: देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव लाने की दिशा में केंद्र सरकार जल्द ही अहम कदम उठाने जा रही है। गुरुवार को संसद में एक नया विधेयक पेश किया जाएगा, जिसका मकसद लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है।

लोकसभा की सीटें बढ़ाने की योजना

इस प्रस्ताव के तहत लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर अधिकतम 850 तक करने की योजना है। इसमें राज्यों के लिए 815 सीटें और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें तय करने का प्रावधान रखा गया है। सरकार का मानना है कि इससे बढ़ती आबादी के अनुसार बेहतर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सकेगा।

संविधान में बदलाव की तैयारी

इस विधेयक में संविधान के अनुच्छेद 81 में संशोधन का प्रस्ताव है। इसके अनुसार, राज्यों से अधिकतम 815 सांसद सीधे चुनाव के जरिए चुने जाएंगे। केंद्र शासित प्रदेशों से अधिकतम 35 सदस्य संसद द्वारा तय प्रक्रिया से चुने जाएंगे।

जनसंख्या के आधार पर सीटों का बंटवारा

नई सीटों का निर्धारण 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर किया जाएगा। विधेयक में साफ कहा गया है कि वही जनसंख्या आंकड़े मान्य होंगे, जिन्हें आधिकारिक रूप से घोषित किया जा चुका है।

महिलाओं को 33% आरक्षण लागू करने पर जोर

सरकार 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को जल्द लागू करना चाहती है। इसके तहत लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और केंद्र शासित प्रदेशों जैसे दिल्ली और जम्मू-कश्मीर में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित की जाएंगी। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 239AA, 330A, 332A और 334A के तहत प्रावधान किए गए हैं। इस आरक्षण में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग की महिलाओं को भी शामिल किया जाएगा।

सरकार का कहना है कि अगली जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया में काफी समय लग सकता है। ऐसे में महिला आरक्षण लागू होने में देरी हो सकती है। इसलिए मौजूदा आंकड़ों के आधार पर इस प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया है, ताकि महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी जल्द बढ़ाई जा सके।

चुनावों पर क्या पड़ेगा असर?

प्रस्ताव के मुताबिक, जब परिसीमन आयोग अपनी अंतिम अधिसूचना जारी करेगा, उसके बाद होने वाले आम चुनाव और उपचुनावों में यह नई व्यवस्था लागू हो जाएगी। सरकार का मानना है कि इस कदम से संसद और विधानसभाएं ज्यादा प्रतिनिधित्वपूर्ण बनेंगी और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और मजबूत होगी।

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