अब विदेश की धरती पर पढ़ाई के लिए जाने वाले स्टूडैंट्स की संख्या में साफ तौर पर कमी आने लगी है। यह कमी ज्यादातर अमरीका, कनाडा, यू.के. व ऑस्ट्रेलिया में कोर्स करने के लिए जाने वाले स्टूडैंट्स में आई है। इसकी वजह हर देश ने अपने इमिग्रेशन नियमों में बदलाव किया है, वहीं दूसरी यूनिवर्सिटी भी अब उन्हीं बच्चों को ले रही हैं, जिनके इंगलिश स्किल अच्छे हों और ग्रैजुएशन करके जाने वाले हैं। वर्ष 2024 में विदेशी धरती पर जाकर पढ़ाई करने वाली स्टूडैंट्स में 20 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।
मगर अब स्टूडैंट्स अपनी स्टडी के हिसाब से अपनी डैस्टिनेशन का चयन कर रहे हैं। यानि अगर स्टूडैंट्स बिजनैस स्टडी की पढ़ाई करना चाहता है तो वह दुबई को अपनी पहली पसंद मान रहा है। यहीं नहीं दुबई में कोर्स के लिए स्टूडैंट्स को फीस के लिए भी दोगुना रकम अदा नहीं करनी पड़ रही। वहीं कनाडा व ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई के लिए जीआईसी ही डबल देनी पड़ रही है। इससे परिवार वालों को अपने बच्चे को बाहर भेजने के लिए लोन व घर को बेचना पड़ रहा है। ब्रिटिश काऊंसिल की जारी रिपोर्ट फाइव ट्रैंड्स टू वॉच भी कहती है कि आगामी कुछ वर्षो में ब्रिटेन आने वाले भारतीयों की संख्या में गिरावट आएगी। रिपोर्ट में इसकी वजह ब्रिटेन द्वारा वीजा नियमों में सख्ती करना है। इससे केवल बहुत गंभीर और मैरिटोरियस छात्र ही ब्रिटेन जाना पसंद करेंगे। यहां तक यूके ने वर्क परमिट भी डेढ़ वर्ष का कर दिया है। इसी वजह से भारतीय छात्र केवल सम्मान गुणवत्ता की शिक्षा लेने में अपना फायदा देख रहे है। इनमें फ्रांस, जर्मनी, आयरलैंड, नीदरलैंडस, फिनलैंड जैसे यूरोपीय देश तो शामिल हैं।
पिछले 5 वर्षो में विदेश में पढ़ने वाले स्टूडैंट्स में हुई थी 52.2% की वृद्धि
आंकड़ों के मुताबिक पिछले पांच में वर्षो में विदेश में पढ़ने वाले भारतीयों की संख्या में 52.2 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई थी, जो 2019 में 5,86,337 से बढ़कर 2023 में 8,92,989 हो गई थी। विदेश में पढ़ने वाले 8,92,989 भारतीय छात्रों में से सबसे बड़ा समूह 2,34,473 छात्रों के साथ संयुक्त राज्य अमरीका में है, इसके बाद 2,33,532 छात्रों के साथ कनाडा और 1,36,921 छात्रों के साथ यूनाइटेड किंगडम का स्थान है।
बैंड न ले पाना भी स्टूडैंट्स की सबसे बड़ी समस्या
अगर अपनी मनपसंद की यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेना है तो वहां के लिए रिक्वायर बैंड भी होने चाहिए। पिछले वर्षो में 5 बैंड वाले स्टूडैंट्स की फाइल को भी लिया जा रहा था लेकिन अब नियम बदलने की वजह से स्टूडैंट्स को बैंड भी ज्यादा लेने पड़ रहे हैं। यही नहीं स्कोर के हिसाब से यूनिवर्सिटी बच्चे को ले रही है। यह भी एक सबसे बड़ी वजह बनी है बिग-4 देशों को छोड़कर दूसरे देशों में पढाई करने का रूझान बढ़ा है।
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