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चुनावों में पैसों से थी वोट खरीदने की तैयारी! 1000 करोड़ रुपये की नकदी, शराब और अन्य सामग्री जब्त

November 18, 2024

चुनावों में पैसों से थी वोट खरीदने की तैयारी! 1000 करोड़ रुपये की नकदी, शराब और अन्य सामग्री जब्त

नयी दिल्ली: चुनावों में मतदाताओं को प्रलोभन देने के हथकंडों पर रोक के लिए चुनाव आयोग की सख्ती के बीच प्रवर्तन एजेंसियों ने महाराष्ट्र और झारखंड दोनों विधान सभा चुनावों के साथ-साथ उपचुनावों के प्रचार अभियान के दौरान 1082 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी, शराब और अन्य सामग्री जब्त की हैं।

आयोग ने सोमावार को जारी एक विज्ञप्ति में कहा कि इस बार महाराष्ट्र और झारखंड में कुल जब्ती 2019 की तुलना में सात गुना अधिक हुई है। दोनों राज्यों में प्रचार अभियान आज शाम पांच बजे थम गया। इस समय 14 राज्यों में उपचुनाव भी चल रहे हैं।

आयोग की विज्ञप्ति में कहा गया है, चुनाव आयोग के तहत प्रवर्तन एजेंसियों ने महाराष्ट्र, झारखंड विधानसभा चुनावों और उपचुनावों में 1082.2 करोड़ रुपये की नकदी, शराब, ड्रग्स, मुफ्त उपहार और अन्य प्रलोभन की वस्तुओं को जब्त किया है।

महाराष्ट्र और झारखंड राज्यों में कुल मिलाकर 858 करोड़ रुपये की जब्ती की गयी है जो इन राज्यों में 2019 के विधानसभा चुनावों के दौरान की गई जब्ती से सात गुना अधिक है। वर्ष 2019 के विधानसभा चुनावों में, महाराष्ट्र में 103.61 करोड़ रुपये की नकदी जब्त की गयी थी, जबकि झारखंड में जब्त राशि 18.76 करोड़ रुपये थी। जो इस बार जब्त नकदी क्रमश: 153.48 करोड़ रुपये और 14.84 करोड़ रुपये बतायी गयी है।

आयोग की विज्ञप्ति के अनुसार महाराष्ट्र में इस बार 71.13 करोड़ रुपये की शराब, 72.14 करोड़ रुपये की नशीली दवाएं,282.49 की महंगी धातुएं तथा 80.94 करोड़ रुपये के प्रलोभन के सामान जब्त किए गए। झारखंड में इस बार 7.84 करोड़ रुपये की शराब, 14.84 करोड़ रुपये की मादक पदार्थ, 8.38 की महंगी धातुएं तथा 152.22 करोड़ रुपये के प्रलोभन के सामान जब्त किए गए।

इस दौरान 14 राज्यों में उपचुनाव के प्रचार अभियान 13.65 करोड़ रुपये की नकदी 40.86 करोड़ रुपये की शराब 36.59 करोड़ रुपये की नशीली दवाएं 11.21 की महंगी धातुएं 121.60 करोड़ रुपये के प्रलोभन के सामान सहित कुल 223.91 करोड़ रुपये की नकदी, शराब और सामान जब्त किए गए।

मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और डॉ. सुखबीर सिंह संधू ने प्रवर्तन एजेंसियों, केंद्रीय पर्यवेक्षकों की बैठकों और पड़ोसी राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठकों के दौरान लगातार चुनावों में धनबल की भूमिका पर अंकुश लगाने पर जोर दिया है।

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