नेशनल डेस्क: दिल्ली-एनसीआर के लोगों को गुरुवार को भीषण गर्मी से बड़ी राहत मिली। दोपहर के बाद अचानक मौसम बदला और तेज हवाओं के साथ कई इलाकों में जोरदार बारिश शुरू हो गई। बारिश के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई और लोगों को उमस व गर्मी से राहत मिली। बारिश से पहले आसमान में घने काले बादल छा गए, जिससे दिन के समय भी अंधेरा जैसा माहौल बन गया। कई जगहों पर तेज हवाएं चलीं और कुछ इलाकों में गरज-चमक के साथ बारिश हुई।
मौसम विभाग ने जारी किया येलो अलर्ट
IMD ने 4 और 5 जून के लिए दिल्ली-एनसीआर में येलो अलर्ट जारी किया है। अगले कुछ घंटों में दिल्ली के नरेला, अलीपुर, बुराड़ी, बादली, मॉडल टाउन, करावल नगर, आजादपुर, दिल्ली विश्वविद्यालय, सिविल लाइंस, दिलशाद गार्डन, सीमापुरी, कश्मीरी गेट, सीलमपुर, शाहदरा, विवेक विहार और लाल किला सहित कई क्षेत्रों में मध्यम से तेज बारिश हो सकती है। इसके अलावा एनसीआर के कुछ इलाकों में भी बारिश, बिजली चमकने और 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि और तूफानी मौसम की भी आशंका है।
इस साल मानसून में हो सकती है कम बारिश
मौसम विभाग ने हाल ही में अपने मानसून पूर्वानुमान में बदलाव करते हुए बताया है कि इस वर्ष देश में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। 2026 के मानसून सीजन में देशभर में औसतन दीर्घकालिक औसत (एलपीए) का लगभग 90 प्रतिशत वर्षा होने का अनुमान है। एलपीए का मतलब किसी क्षेत्र में लंबे समय आमतौर पर 30 से 50 वर्षों के दौरान दर्ज की गई औसत वर्षा से होता है। भारत में 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर मानसूनी वर्षा का एलपीए 87 सेंटीमीटर निर्धारित किया गया है। यदि मानसून के दौरान वर्षा एलपीए के 90 प्रतिशत से कम रहती है, तो उसे मौसम विभाग की भाषा में ‘अल्प वर्षा’ या सामान्य से कम बारिश माना जाता है।
मानसून पर पड़ सकता है अल नीनो का असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस साल बारिश कम होने की एक बड़ी वजह अल नीनो की स्थिति हो सकती है। अल नीनो एक जलवायु घटना है, जिसका असर दुनिया के कई देशों के मौसम पर पड़ता है। भारत में इसके कारण अक्सर मानसून कमजोर पड़ जाता है और बारिश कम होती है। फिलहाल भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर क्षेत्र में तटस्थ स्थिति बनी हुई है, लेकिन धीरे-धीरे अल नीनो के विकसित होने के संकेत मिल रहे हैं। मौसम विभाग का अनुमान है कि जून महीने में इसका प्रभाव कमजोर रहेगा, लेकिन सितंबर तक यह मध्यम या मजबूत रूप ले सकता है।
केरल पहुंचा दक्षिण-पश्चिम मानसून
इस बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून ने गुरुवार को केरल में प्रवेश कर लिया है। आमतौर पर मानसून 1 जून के आसपास केरल पहुंचता है और यहीं से पूरे देश में मानसून की शुरुआत मानी जाती है। हालांकि मौसम विभाग ने पहले अनुमान लगाया था कि इस वर्ष मानसून 26 मई को ही केरल पहुंच जाएगा, लेकिन इसकी वास्तविक एंट्री कुछ दिनों की देरी से हुई। अब मानसून धीरे-धीरे देश के अन्य हिस्सों की ओर बढ़ेगा, जिससे आने वाले दिनों में कई राज्यों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

