
नई दिल्ली: भारत ने एक बार फिर रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने मंगलवार को कहा कि भारत रूस और यूक्रेन दोनों के संपर्क में है और अगर वह संघर्ष को खत्म करने में किसी भी तरह मदद कर सकता है तो इसके लिए तैयार है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नियमित मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा कि भारत लगातार मानता रहा है कि यह युद्ध का दौर नहीं है और किसी भी विवाद का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं निकाला जा सकता। उन्होंने बताया कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर का 3 से 5 सितंबर तक यूक्रेन और पोलैंड का दौरा इसी दिशा में था। इस दौरे के दौरान बातचीत और कूटनीति के जरिए संघर्ष को खत्म करने की संभावनाओं पर चर्चा की गई।
जयसवाल के मुताबिक, एस. जयशंकर 3 सितंबर को यूक्रेन की राजधानी कीव पहुंचे। वहां उन्होंने यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा से मुलाकात की और राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की से भी बातचीत की। जयसवाल ने कहा कि जयशंकर ने बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस संदेश को भी दोहराया कि लंबे समय से चल रहे युद्ध को अब खत्म करने का रास्ता तलाशना चाहिए।
भारत का मानना है कि संघर्ष में शामिल पक्षों को बातचीत के जरिए समाधान का रास्ता निकालना होगा। उन्होंने कहा कि भारत दोनों पक्षों से संपर्क में है और ऐसे विचारों और सुझावों पर काम कर रहा है, जो संघर्ष को खत्म करने में मदद कर सकते हैं।
आगामी BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इन बैठकों में रूस-यूक्रेन संघर्ष भी चर्चा के मुद्दों में शामिल हो सकता है। MEA के मुताबिक, प्रधानमंत्री की किन नेताओं के साथ बैठक होगी और उनका समय क्या रहेगा, इसकी जानकारी बाद में साझा की जाएगी।
रूसी सेना में काम कर रहे भारतीय नागरिकों को लेकर भी विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी। रणधीर जायसवाल ने कहा कि करीब दो दर्जन भारतीय अभी भी रूसी सेना में हैं। भारत ने उनकी रिहाई का मुद्दा रूसी सरकार के सामने उठाया है और उम्मीद है कि उन्हें जल्द रिहा किया जाएगा।
इससे पहले 31 अगस्त को विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बताया था कि कुल 227 भारतीय नागरिकों को रूसी सेना में भर्ती किया गया था। इनमें से 139 को छुट्टी मिल चुकी है, जबकि 51 भारतीयों की मौत हो चुकी है। भारत बाकी भारतीयों की रिहाई और सुरक्षित वापसी के लिए रूस के साथ लगातार बातचीत कर रहा है।
इसी बीच, रूस ने भी भारत के रुख का स्वागत किया है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि रूस यूक्रेन संघर्ष का शांतिपूर्ण समाधान चाहता है और इस मुद्दे पर भारत की स्थिति काफी हद तक रूस के रुख से मेल खाती है। पेसकोव ने कहा कि रूस भारत की संघर्ष को खत्म करने में मदद करने की इच्छा का स्वागत करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच होने वाली द्विपक्षीय बैठक यूक्रेन संघर्ष और अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा का महत्वपूर्ण अवसर होगी। रूस के मुताबिक, इस बैठक में पुतिन प्रधानमंत्री मोदी को यूक्रेन संघर्ष की मौजूदा स्थिति की जानकारी दे सकते हैं और दोनों नेता अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अपने विचार साझा कर सकते हैं।
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