नई दिल्ली। भारत और रूस के बीच कई बड़े फैसले लिए गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई इस बैठक में प्रवासन, स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सहयोग और भविष्य की आर्थिक साझेदारी को लेकर कई अहम समझौते किए गए। आइए इसे विस्तार से जानते हैं…
प्रवासन और लोगों की आवाजाही पर नया समझौता
भारत और रूस ने ऐसा समझौता किया है जिससे दोनों देशों के लोगों के आने–जाने, काम करने और पढ़ने में आसानी होगी। अब वीज़ा प्रक्रियाएं सरल होंगी। छात्रों, पेशेवरों और कामगारों को लाभ मिलेगा।
#WATCH दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत और रूस के बीच समझौतों का आदान-प्रदान देखा।
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— ANI_HindiNews (@AHindinews) December 5, 2025
स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा में सहयोग
दोनों देशों ने यह तय किया कि वे एक–दूसरे की मदद स्वास्थ्य सेवाओं और भोजन की सुरक्षा में बढ़ाएंगे। बीमारियों से लड़ने में संयुक्त शोध खाद्य गुणवत्ता को बेहतर बनाने पर काम। इससे नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और सुरक्षित खाद्य सामग्री मिल सकेगी।
बंदरगाह और पोत परिवहन पर MoU
भारत और रूस ने बंदरगाह विकास और जहाजों के संचालन पर एक समझौते पर हस्ताक्षर किया।
-समुद्री व्यापार बढ़ेगा
-दोनों देशों के बीच माल ढुलाई आसान होगी
-आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी
पीएम मोदी की पुतिन के साथ बैठक के बाद कही गई 5 बड़ी बातें
- जहाज निर्माण और मेक इन इंडिया को बढ़ावा
मोदी ने कहा कि भारत और रूस जहाज निर्माण में मिलकर काम करेंगे। इससे भारत के मेक इन इंडिया अभियान को मजबूती मिलेगी। देश में नई नौकरियां पैदा होंगी। युवाओं के लिए नई स्किल और ट्रेनिंग के अवसर बनेंगे। क्षेत्रीय कनेक्टिविटी यानी देश के अलग–अलग हिस्सों को जोड़ने में मदद मिलेगी।
- आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिए ‘विजन 2030’
बैठक में दोनों देशों ने विजन 2030 नाम का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ साइन किया। इसका मतलब आने वाले 6–7 वर्षों में भारत–रूस व्यापार कई गुना बढ़ाया जाएगा। दोनों देश मिलकर बड़ी कंपनियों और उद्योगों में निवेश करेंगे। सह-उत्पादन (co-production) और सह-नवाचार (co-innovation) के नए रास्ते खुलेंगे।साथ ही मोदी ने कहा कि वे दोनों नेता इंडिया–रूस बिज़नेस फोरम में शामिल होंगे, जिससे व्यापार को नई दिशा मिलेगी। यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU) के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की दिशा में भी आगे बढ़ने का निर्णय हुआ है।
- 80 सालों से स्थिर और मजबूत दोस्ती
मोदी ने कहा कि दुनिया ने पिछले 80 वर्षों में कई संकट और बदलाव देखे, लेकिन भारत–रूस की दोस्ती हमेशा मजबूत रही। यह रिश्ता सम्मान, भरोसे और सहयोग पर बना है। आज की बैठक में रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, तकनीक और शिक्षा जैसे मुद्दों पर गहराई से चर्चा हुई। दोनों देशों ने मिलकर इस रिश्ते को और मजबूत करने का संकल्प लिया
- पुतिन की यात्रा का विशेष महत्व
मोदी ने कहा कि यह 23वां भारत–रूस शिखर सम्मेलन है और पुतिन का आना भारत के लिए खुशी की बात है। उन्होंने याद दिलाया 25 साल पहले पुतिन ने भारत–रूस रणनीतिक साझेदारी की नींव रखी थी। इस साझेदारी ने दोनों देशों के लिए कई लाभदायक परिणाम दिए हैं।
- “स्पेशल एंड प्रिविलिज्ड स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” का 15 साल पूरा
मोदी ने बताया कि साल 2010 में भारत और रूस के रिश्ते को स्पेशल एंड प्रिविलिज्ड स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का दर्जा दिया गया। यह रिश्तों का ऐसा स्तर है जो बहुत कम देशों को मिलता है। मोदी ने पुतिन को “प्रिय मित्र” कहते हुए उनके नेतृत्व और भारत के प्रति सच्चे सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।
ऊर्जा, न्यूक्लियर और क्रिटिकल मिनरल्स पर बड़ा फोकस
मोदी ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा, जैसे– कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, ऊर्जा आपूर्ति इन सब पर भारत–रूस का सहयोग बहुत मजबूत रहा है।
न्यूक्लियर ऊर्जा: स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में बड़ा कदम
सिविल न्यूक्लियर प्रोजेक्टों में दोनों देश दशकों से साथ काम कर रहे हैं, जिससे स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलता है। बिजली उत्पादन सुरक्षित और पर्यावरण–अनुकूल बनता है।
क्रिटिकल मिनरल्स: भविष्य की ऊर्जा की रीढ़
क्रिटिकल मिनरल्स (जैसे लिथियम, कोबाल्ट आदि) आधुनिक तकनीकी उत्पादों में जरूरी होते हैं जैसे इलेक्ट्रिक वाहन, हाई–टेक उपकरण, सोलर बैटरी आदि। इस क्षेत्र में मिलकर काम करने से दोनों देशों की सप्लाई चेन सुरक्षित होगी। नई तकनीकों में तेजी आएगी। उद्योगों में विकास होगा।

