
करनाल। पर्यावरण संरक्षण के लिए वर्षों पहले लगाए ट्री गार्ड अब कई जगह पेड़ों के लिए ही नुकसान का कारण बनते जा रहे हैं। पौधों की सुरक्षा के उद्देश्य से लगाए लोहे के ट्री गार्ड समय रहते नहीं हटाए जाने के कारण बड़े हो चुके पेड़ों के तनों में धंस गए हैं।
कई पेड़ों में लोहे की नुकीली तारें और जालियां अंदर तक घुस चुकी हैं, जिससे उनके प्राकृतिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। करनाल सहित आसपास के क्षेत्रों में ऐसे अनेक पेड़ देखने को मिलते हैं जो वर्षों पुराने ट्री गार्ड की जकड़न में फंसे हुए हैं। इस समस्या को देखते हुए करनाल की लक्ष्य जनहित सोसायटी ने सराहनीय पहल करते हुए “ट्री गार्ड फ्री ट्री अभियान” शुरू किया है। संस्था अब तक करनाल, नीलोखेड़ी, तरावड़ी, कुरुक्षेत्र, फरीदाबाद और भिवानी में 3100 से अधिक पेड़ों को ट्री गार्ड से मुक्त करा चुकी है।
सोसायटी के फाउंडर चेयरमैन दिनेश बख्शी ने बताया कि पौधों को पशुओं और अन्य नुकसान से बचाने के लिए शुरुआती वर्षों में ट्री गार्ड आवश्यक होते हैं, लेकिन जब पौधे बड़े होकर पेड़ बन जाते हैं तो इन्हें समय पर हटा देना चाहिए। ऐसा नहीं होने पर ट्री गार्ड पेड़ों को जकड़ लेते हैं और उनके तनों में धंसने लगते हैं। कई मामलों में पेड़ों से तरल पदार्थ का रिसाव होने लगता है, मानो वे अपनी पीड़ा व्यक्त कर रहे हों। उन्होंने बताया कि विभिन्न स्थानों पर ट्री गार्ड और लोगों द्वारा लगाए गए कील-तारों से छलनी पेड़ों को देखकर उन्हें गहरा दुख हुआ। इसी के चलते 1 जुलाई 2021 को “ट्री गार्ड फ्री ट्री मुहिम” की शुरुआत की गई।
पिछले करीब पांच वर्षों में इस अभियान के तहत हजारों पेड़ों को लोहे की जकड़न से मुक्त कराया गया है। दिनेश बख्शी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उनकी नियमित देखभाल और संरक्षण भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से अपील की कि ऐसे पेड़ों की पहचान कर समयबद्ध तरीके से ट्री गार्ड हटाने की व्यवस्था की जाए। संस्था के सदस्य मुकेश ने कहा कि हमारा उद्देश्य पेड़ों को ट्री गार्ड से मुक्त कराना है। पौधे जब बड़े होकर पेड़ बन जाते हैं तो कई बार ट्री गार्ड उनके तनों को नुकसान पहुंचाने लगते हैं। हमने ऐसे पेड़ों की पहचान कर उन्हें ट्री गार्ड से मुक्त करने का अभियान शुरू किया है।
संस्था के इस अभियान से पेड़ों को नया जीवन मिलेगा और लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि पेड़ हमारे जीवन का आधार हैं। संस्था द्वारा किया जा रहा यह अभियान पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और समाज के सभी लोगों को इसमें सहयोग करना चाहिए। गौरतलब है कि लक्ष्य जनहित सोसायटी पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ समाजसेवा और रक्तदान के क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभा रही है। संस्था को विभिन्न सामाजिक कार्यों के लिए कई सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। स्वयं दिनेश बख्शी 139 बार रक्तदान और 108 बार प्लेटलेट्स दान कर मानव सेवा का उदाहरण प्रस्तुत कर चुके हैं।
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