
नोएडा। ग्रेटर नोएडा के पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की ऐच्छर शाखा में खाताधारकों के करोड़ों रुपये की हेराफेरी के मामले में नया खुलासा हुआ है। इस मामले की मुख्य आरोपी बताई जा रही बैंक की चपरासी दीपांशी बीटेक डिग्रीधारक है। आरोप है कि उसने बैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों की यूजर आईडी और पासवर्ड याद कर लिए थे। इसके बाद वह खाताधारकों की जमा रकम और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में हेराफेरी करती रही।
बैंक में सामने आए इस मामले के बाद प्रबंधन ने तत्कालीन बैंक मैनेजर समेत छह कर्मचारियों को निलंबित कर दिया था। बैंक की ओर से विभागीय जांच रिपोर्ट केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई है। वहीं, पीड़ित खाताधारकों की शिकायत पर बीटा-2 कोतवाली पुलिस ने भी अज्ञात बैंक कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस अब इस मामले में अपनी जांच आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
जानकारी के मुताबिक, 23 अक्टूबर को ऐच्छर गांव स्थित PNB शाखा में कई खाताधारकों की रकम में गड़बड़ी का मामला सामने आया था। शुरुआती जांच में बैंक में चपरासी के पद पर तैनात दीपांशी की भूमिका प्रमुख रूप से सामने आई। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, दीपांशी बीटेक पास थी और उसे कंप्यूटर की अच्छी जानकारी थी।
आरोप है कि उसने बैंक मैनेजर और दूसरे कर्मचारियों की यूजर आईडी और पासवर्ड याद कर लिए थे। इसी जानकारी का इस्तेमाल कर वह खाताधारकों के पैसों में हेराफेरी करती थी। जांच में यह सवाल भी उठ रहा है कि चपरासी के पद पर काम करने वाली कर्मचारी को बैंक के डिजिटल सिस्टम और खातों तक इस तरह की पहुंच कैसे मिली। बैंक में सुरक्षा व्यवस्था और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
इस मामले में सामने आया है कि आरोपी ने ऐसे खाताधारकों को निशाना बनाया था, जिन्हें जमीन अधिग्रहण के बदले मुआवजे की रकम मिली थी। इनमें कई लोग कम पढ़े-लिखे थे और बैंकिंग प्रक्रिया की ज्यादा जानकारी नहीं रखते थे। आरोप है कि दीपांशी ने इन खाताधारकों को अपना निजी मोबाइल नंबर दे रखा था। जब भी कोई खाताधारक बैंक आने की बात करता था, तो वह पहले ही बाहर आकर किसी न किसी बहाने से उसे वापस भेज देती थी। इससे खाताधारकों को अपने खातों में हो रही गड़बड़ी का तुरंत पता नहीं चल पाता था।
जांच में यह भी सामने आया है कि कथित तौर पर हेराफेरी की गई रकम को दूसरे बैंक खातों में भेजा जाता था। इसके लिए आरोपी ने अपने गांव साकीपुर के कुछ लोगों के खातों का इस्तेमाल किया। इस मामले में जिन खाताधारकों के नाम सामने आए हैं, उनमें दीपांशी के अलावा प्रदीप कुमार, मेमबंती देवी, प्रियंका कुमारी और शांती देवी शामिल हैं। ये सभी साकीपुर गांव के रहने वाले बताए जा रहे हैं। इसके अलावा ऐच्छर गांव के आशुतोष पाठक और सरोज देवी के नाम भी सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि दोनों दीपांशी के पुराने परिचित और करीबी हैं। वहीं, एक अन्य आरोपी शालिनी मंडी श्याम नगर की रहने वाली है।
बैंक प्रबंधन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विभागीय जांच कराई और उसकी रिपोर्ट CBI को सौंप दी है। तत्कालीन बैंक मैनेजर समेत छह कर्मचारियों को निलंबित किया जा चुका है। दूसरी तरफ, पीड़ित खाताधारकों की शिकायत पर बीटा-2 कोतवाली पुलिस ने भी मामला दर्ज किया है। पुलिस अब बैंक प्रबंधन को नोटिस जारी कर पूरे घटनाक्रम से जुड़े दस्तावेज और जानकारी मांगने की तैयारी कर रही है।
बीटा-2 कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार के मुताबिक, मामले की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम के बारे में स्पष्ट जानकारी दी जा सकेगी। फिलहाल इस मामले में बैंक कर्मचारियों की भूमिका, खातों में हुए लेनदेन और रकम ट्रांसफर किए जाने से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
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