चमोलीः उत्तराखंड के चमोली जिले के पीपलकोटी इलाके में गुरुवार शाम एक बड़ा हादसा हो गया। जिसमें HCC की साइट पर बन रही DRT टनल के अंदर अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा आ जाने से कई मजदूर फंस गए। हादसे में 7 मजदूरों की मौत होने की अबतक जानकारी सामने आई है। वहीं, 18 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। बाकी लोगों की तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।
अचानक टनल में भर गया पानी और मलबा
जानकारी के मुताबिक, हादसा गुरुवार शाम करीब 6:30 से 6:45 बजे के बीच हुआ। उस समय मजदूर टनल के अंदर निर्माण कार्य में जुटे हुए थे। टनल के गेट से करीब डेढ़ से 1.8 किलोमीटर अंदर एक कैविटी यानी जमीन के अंदर बनी खाली जगह से अचानक बड़ी मात्रा में पानी और मलबा बाहर आने लगा। देखते ही देखते पानी और मलबा टनल के अंदर फैल गया और वहां काम कर रहे मजदूर इसकी चपेट में आ गए।
#WATCH चमोली, उत्तराखंड: NDRF के टीम कमांडर अमृत लाल मीणा ने कहा, “जब हमारी टीम यहां पहुंची और ऑपरेशन शुरू किया, तो सुरंग में भारी मात्रा में पानी भरा हुआ था और किनारों से भी पानी रिस रहा था, अभी तक पानी काफी भर गया है…हमारे जवान खास उपकरण पहनकर अब तक पानी से 4 शव निकाल चुके… https://t.co/x3jqcB2nkY pic.twitter.com/d0fYxfft9X
— ANI_HindiNews (@AHindinews) August 13, 2026
बताया जा रहा है कि इस दौरान टनल के अंदर जोरदार आवाज या धमाके जैसी स्थिति भी महसूस हुई। इसके बाद अचानक पानी और मलबा तेजी से सुरंग में भरने लगा। मजदूरों के बीच अफरातफरी मच गई और सभी अपनी जान बचाने के लिए बाहर की ओर भागने लगे।
पानी और मलबे में फंस गए मजदूर
पानी और मलबे का बहाव इतना तेज था कि कई मजदूर इसकी चपेट में आ गए। कुछ मजदूर बहकर टनल के बाहरी हिस्से की ओर आने लगे, जबकि कुछ मलबे में फंस गए। हादसे के बाद सुरंग के अंदर से चीख-पुकार की आवाजें सुनाई देने लगीं। स्थिति गंभीर होने के कारण तत्काल राहत और बचाव टीमों को मौके पर बुलाया गया।
22 मजदूरों के फंसे होने की जानकारी
अधिकारियों के मुताबिक, हादसे के समय टनल के अंदर करीब 22 मजदूर फंसे हुए थे। रेस्क्यू टीमों ने तेजी से अभियान चलाकर अब तक 18 मजदूरों को बाहर निकाल लिया है। हालांकि, हादसे में 7 मजदूरों की मौत की जानकारी सामने आई है। बाकी लोगों की स्थिति और उनकी तलाश को लेकर बचाव अभियान लगातार जारी है।
रात में रोकना पड़ा था रेस्क्यू ऑपरेशन
हादसे के बाद SDRF, NDRF, जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और बचाव अभियान शुरू किया। रात के समय टनल के अंदर बड़ी मात्रा में मलबा जमा हो जाने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा। मलबा हटाने और अंदर का रास्ता सुरक्षित बनाने के बाद बचाव अभियान दोबारा शुरू किया गया। रेस्क्यू टीमें टनल के अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के लिए लगातार काम कर रही हैं।
3.5 किलोमीटर लंबी है टनल
जिस सुरंग में हादसा हुआ है, उसकी कुल लंबाई करीब 3.5 किलोमीटर बताई जा रही है। हादसा टनल के अंदर लगभग 1.8 किलोमीटर की दूरी पर हुआ। बताया गया है कि उस समय सुरंग में ग्रेविटी पर पैकिंग का काम चल रहा था। इसी दौरान अचानक कैविटी से पानी और मलबा आने लगा, जिससे वहां काम कर रहे मजदूर मुश्किल में फंस गए।
CM धामी ने रेस्क्यू ऑपरेशन की निगरानी की
हादसे की जानकारी मिलते ही उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को युद्धस्तर पर राहत और बचाव अभियान चलाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने प्रभावित मजदूरों को हर संभव मदद उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए हैं। वह लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और अधिकारियों से इसकी जानकारी ले रहे हैं। टनल में काम करने वाले मजदूरों में छत्तीसगढ़ और झारखंड के लोग भी शामिल बताए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री धामी ने दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों से भी बातचीत की और हादसे की जानकारी साझा की।
SDRF और NDRF की टीमें मौके पर
हादसे के बाद SDRF और NDRF के साथ जिला प्रशासन तथा आपदा प्रबंधन विभाग की टीमें बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। टीमों का मुख्य लक्ष्य टनल के अंदर फंसे लोगों तक पहुंचना, मलबा हटाना और सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालना है। सुरंग के अंदर लगातार बदल रही स्थिति को देखते हुए बचाव दल सावधानी से आगे बढ़ रहे हैं।
पहले भी हो चुका है हादसा
चमोली जिले में इससे पहले भी सुरंग से जुड़ा एक बड़ा हादसा सामने आ चुका है। पिछले साल दिसंबर में चमोली में सुरंग के अंदर दो लोको ट्रेनें आपस में टकरा गई थीं। इस हादसे में करीब 70 लोग घायल हुए थे। अब एक बार फिर टनल में हुए हादसे ने सुरक्षा व्यवस्था और निर्माण कार्य के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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