
नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र से जुड़े वैश्विक वन्य जीव व्यापार संगठन CITES ने भारत पर लुप्तप्राय जंगली जानवरों के आयात पर रोक लगाने की अपनी पुरानी सिफारिश वापस ले ली है। यह वही मुद्दा था जिसकी वजह से अनंत अंबानी की वनतारा परियोजना पर भ्रम फैलाने की कोशिश की गई थी। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, CITES ने यह फैसला तब बदला जब भारत, अमेरिका, जापान और ब्राजील जैसे देशों ने कहा कि आयात में अवैध गतिविधि का कोई सबूत नहीं है और रोक लगाना बहुत जल्दीबाजी होती।

यूएन से जुड़ी वाइल्डलाइफ संस्था ने माना ‘वनतारा’ दुनिया का बेहतरीन कंजर्वेशन मॉडल –
CITES ने भारत पर वन्य जीव आयात रोक हटाई. वनतारा को कानूनी और वैश्विक मानकों पर क्लीन चिट मिली. अनंत अंबानी का वनतारा संरक्षण में अग्रणी साबित हुआ।
संयुक्त राष्ट्र से जुड़े वैश्विक वन्य जीव व्यापार संगठन CITES ने भारत पर लुप्तप्राय जंगली जानवरों के आयात पर रोक लगाने की अपनी पुरानी सिफारिश वापस ले ली है। यह वही मुद्दा था जिसकी वजह से अनंत अंबानी की वनतारा परियोजना पर भ्रम फैलाने की कोशिश की गई थी। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, CITES ने यह फैसला तब बदला जब भारत, अमेरिका, जापान और ब्राजील जैसे देशों ने कहा कि आयात में अवैध गतिविधि का कोई सबूत नहीं है और रोक लगाना बहुत जल्दीबाजी होती।
यूएन की वाइल्डलाइफ संस्था ने माना ‘वनतारा’ दुनिया का बेहतरीन कंजर्वेशन मॉडल
वनतारा को यूएन से जुड़ी संस्था ने सर्वश्रेष्ठ करार दिया। रविवार को हुई CITES की 20वीं बैठक में स्टैंडिंग कमेटी और ज्यादातर सदस्य देशों ने भारत के पक्ष में स्पष्ट समर्थन जताया। उन्होंने कहा कि भारत के खिलाफ पशु आयात को लेकर कोई सबूत या कारण नहीं है कि उस पर किसी कार्रवाई की जाए। यह फैसला वनतारा के कानूनी, पारदर्शी और वैज्ञानिक तरीकों पर आधारित वाइल्डलाइफ केयर मॉडल की बड़ी पुष्टि है। इससे यह साबित होता है कि वनतारा वैश्विक मानकों का पालन करता है और दुनिया के सबसे नैतिक और पेशेवर ढंग से चलने वाले संरक्षण केंद्रों में से एक है।
CITES टीम ने माना था बेहतर –
CITES सेक्रेट्रेट के अधिकारियों ने सितंबर 2025 में वनतारा का दो दिन का निरीक्षण किया था। इस दौरान टीम ने वनतारा के एनक्लोजर, मेडिकल सुविधाओं, रिकॉर्ड, रेस्क्यू सिस्टम और जानवरों की देखभाल से जुड़े सभी नियमों की जांच की. 30 सितंबर 2025 को स्टैंडिंग कमेटी को दी गई अपनी रिपोर्ट में सचिवालय ने वंतारा को एक आधुनिक, कल्याण-प्रधान और उच्च स्तरीय संस्था बताया. इसमें कहा गया कि वंतारा का काम पूरी तरह जानवरों के संरक्षण और देखभाल पर केंद्रित है और यहां किसी तरह का व्यावसायिक व्यापार नहीं होता। रिपोर्ट में यह भी लिखा गया कि वंतारा हर कदम पर खुलापन, सहयोग और CITES के नियमों का पालन दिखाता है।
सुप्रीम कोर्ट की SIT ने भी दिया था वनतारा को क्लीन चिट –
कुछ दिनों पहले भारत की सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (SIT) ने भी अपनी रिपोर्ट दी थी, जिसमें साफ साफ कहा था कि वनतारा में सबकुछ बेहतर है और उसमें कोई गड़बड़ी के सबूत नहीं मिले हैं। यह रिपोर्ट से भी पूरी तरह उसी से मेल खाती है। SIT को वनतारा से जुड़े सभी कानूनी, वित्तीय, वेलफेयर और CITES आरोपों की जांच सौंपी गई थी। गहरी जांच के बाद SIT ने कहा कि सभी शिकायतें और मीडिया में आई कई रिपोर्टें बिना आधार, झूठी और किसी कानूनी या तथ्यात्मक सबूत के बिना थीं।

वंतारा के बारे में जानें –
वनतारा अनंत अंबानी द्वारा शुरू किया गया एक बड़ा वाइल्डलाइफ संरक्षण और रेस्क्यू प्रोजेक्ट है। यह रिलायंस इंडस्ट्रीज और रिलायंस फाउंडेशन द्वारा समर्थित है। गुजरात के जामनगर रिफाइनरी परिसर में बने 3,000 एकड़ के क्षेत्र में वनतारा घायल, पीड़ित, और लुप्तप्राय जानवरों के बचाव और पुनर्वास पर काम करता है। यह भारत की तरह पहला और सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है, जिसे अनंत अंबानी के नेतृत्व में तैयार किया गया है। वनतारा अत्याधुनिक अस्पताल, रिसर्च सेंटर, हेल्थकेयर सुविधाएं के साथ अंतरराष्ट्रीय संस्थानों जैसे IUCN और WWF के साथ भी काम करता है। पिछले कुछ वर्षों में वनतारा ने 200 से अधिक हाथियों और हजारों अन्य जानवरों, पक्षियों और सरीसृपों को खतरनाक परिस्थितियों से बचाया है। यह प्रोजेक्ट गैंडा, तेंदुआ और मगरमच्छ जैसी प्रमुख प्रजातियों के संरक्षण और पुनर्वास पर भी काम कर रहा है।