Last Updated: October 4, 2026

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Independence Day 2026: लाल किले से पहली बार गूंजेगा ‘वंदे मातरम’ का पूर्ण स्वरूप, सभी छह छंदों का होगा गायन

August 15, 2026

Independence Day 2026: लाल किले से पहली बार गूंजेगा ‘वंदे मातरम’ का पूर्ण स्वरूप, सभी छह छंदों का होगा गायन

Vande Mataram: देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से इतिहास में पहली बार राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ का पूर्ण स्वरूप प्रस्तुत किया जाएगा। गीत की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में होने वाले इस विशेष आयोजन में इसके सभी छह छंदों का गायन किया जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयोजित समारोह में ‘वंदे मातरम’ का गायन राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ से पहले होगा। अब तक स्वतंत्रता दिवस समारोहों में राष्ट्रगीत के शुरुआती दो पद ही प्रमुख रूप से प्रस्तुत किए जाते रहे हैं, लेकिन इस बार परंपरा से हटकर इसका लंबा और पूर्ण स्वरूप शामिल किया गया है। नए दिशा-निर्देशों के तहत राष्ट्रीय समारोहों में राष्ट्रगान से पहले राष्ट्रगीत के पूर्ण स्वरूप की प्रस्तुति को प्राथमिकता दी जाएगी।

यह भव्य कार्यक्रम राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ की 150 साल पुरानी विरासत को याद करने के साथ ही 2047 तक देश को ‘विकसित भारत’ बनाने की यात्रा में ‘युवा शक्ति’ की ऊर्जा, आकांक्षाओं और अहम योगदान का जश्न मनाने के लिए आयोजित किया जा रहा है।

वायुसेना करेगी पुष्प वर्षा
इस दौरान भारतीय वायुसेना के एमआई-17 हेलीकॉप्टर द्वारा पुष्प वर्षा की जाएगी और ‘वंदे मातरम’ अंकित विशेष ध्वज के साथ उड़ान भरी जाएगी।

राष्ट्रगान के समान कानूनी स्थिति
संसद ने हाल ही में राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक पारित किया, जो ‘वंदे मातरम’ को अपमान के कृत्यों से कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है और राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान कानूनी स्थिति में रखता है।

लोकसभा में डीएमके ने इस विधेयक विरोध किया, जिसने बाद में राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया। डीएमके ने सरकार पर राष्ट्रीय गीत के जरिए ‘देश को विभाजित’ करने का आरोप लगाया। हालांकि, भाजपा ने संशोधन का बचाव किया और कहा कि इससे सुनिश्चित होगा कि भारतीय नागरिक बिना किसी बाधा के ‘वंदे मातरम’ के प्रति सम्मान प्रकट कर सकें।

1875 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था ये गीत
बता दें कि राष्ट्र गीत ‘वंदे मातरम’ बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 7 नवंबर, 1875 को लिखा था। राष्ट्र गीत को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा का एक महान स्रोत माना जाता है। रोचक बात यह है कि इस अमर गीत की रचना संस्कृत और बंगाली भाषा के मिश्रण में की गई थी। रचना के बाद सबसे पहले यह गीत 1882 में उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ में प्रकाशित हुआ था। उपन्यास में यह गीत एक संन्यासी द्वारा गाया गया।

 

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