नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विशाख रिफानरी में हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) की ओर से रेसिड्यू अपग्रेडेशन फैसिलिटी (आरयूएफ) का ऑपरेशन शुरू किए जाने के बाद इसकी तारीफ की है। उन्होंने कहा कि यह अत्याधुनिक प्लांट हमारी ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने के प्रयासों को नई गति प्रदान करता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के ‘एक्स’ पोस्ट पर जवाब देते हुए लिखा, “यह अत्याधुनिक फैसिलिटी ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देने की हमारी कोशिशों को गति देती है, जिससे हम इस सेक्टर में आत्मनिर्भर बन रहे हैं।”
इससे पहले केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ‘एक्स’ पोस्ट में जानकारी दी कि विशाख रिफाइनरी में एचपीसीएल की रेसिड्यू अपग्रेडेशन फैसिलिटी के सफल चालू होने के साथ ही भारत की ऊर्जा सुरक्षा हासिल करने की यात्रा में एक मील का पत्थर स्थापित हुआ है। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश में यह महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के दूरदर्शी नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
This state-of-the-art facility adds momentum to our efforts towards boosting energy security, thus becoming Aatmanirbhar in this sector. @HardeepSPuri https://t.co/RtUCMHPkD4
— Narendra Modi (@narendramodi) January 6, 2026
हरदीप सिंह पुरी ने लिखा, “यह फैसिलिटी स्वदेशी इंजीनियरिंग का एक बेहतरीन नमूना है, जिसमें 2,200 मीट्रिक टन वजनी तीन एलसी-मैक्स रिएक्टर हैं, जो दुनिया के सबसे भारी इंजीनियरिंग ब्लॉकों में से हैं।” उन्होंने बताया कि ये सभी ब्लॉक भारत में ही बनाए और असेंबल किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि 3.55 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (एमएमटीपीए) क्षमता वाली यह सुविधा एडवांस्ड रेसिड्यू हाइड्रोक्रैकिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करती है, जिससे कच्चे तेल के निचले हिस्से का लगभग 93 प्रतिशत उच्च-मूल्य उत्पादों में बदलना संभव हो पाता है। इससे हर बैरल तेल का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल सुनिश्चित होगा और देश की बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी।
हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “कच्चे तेल को रिफाइन करने के तरीके की दिशा में एक मील का पत्थर। एचपीसीएल की विशाख रिफाइनरी में दुनिया की पहली एलसी-मैक्स आधारित रेसिड्यू अपग्रेडेशन फैसिलिटी शुरू होने से कच्चे तेल के सबसे भारी हिस्से का 93 प्रतिशत अब कम कीमत वाले रेसिड्यू के रूप में छोड़े जाने के बजाय, उपयोगी ईंधन में बदल जाता है।”