करनाल। यहां की घरौंडा अनाज मंडी में उत्तर प्रदेश से सस्ती दरों पर गेहूं लाकर यहां समर्थन मूल्य पर बेचा जा रहा है। इससे सरकारी सिस्टम को नुकसान तो हो ही रहा है। साथ ही स्थानीय किसानों का हक भी मारा जा रहा है।
उत्तर प्रदेश और हरियाणा के दामों पर खेल
किसानों का आरोप है कि व्यापारी उत्तर प्रदेश से करीब 2300 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से गेहूं खरीदकर ला रहे हैं। उसे 2585 रुपये प्रति क्विंटल के सरकारी समर्थन मूल्य पर बेचा जा रह है। इस पूरे खेल में भारी मुनाफा कमाया जा रहा है, जबकि असली किसान पीछे छूटता नजर आ रहा है। सबसे गंभीर आरोप यह है कि यूपी से लाई गई गेहूं को स्थानीय किसानों के नाम पर मंडी पोर्टल में दर्ज किया जा रहा है। यानी जो गेहूं हरियाणा के किसानों की नहीं है, उसे भी उनके नाम से दिखाकर सिस्टम को गुमराह किया जा रहा है।
गेट पर हंगामे के बाद रोकी ट्राॅलियां
मामला तब गरमाया जब मंडी गेट पर दो ट्राॅलियों को रोक लिया गया। जांच में सामने आया कि ट्रालियां उत्तर प्रदेश से आई थीं। इसके बाद मौके पर विवाद खड़ा हो गया और माहौल तनावपूर्ण हो गया। गुस्साए आढ़ती प्रवीण कुमार ने आरोप लगाते हुए कहा कि, “मंडी में रोजाना दर्जनों ट्रालियां यूपी से लाई जा रही हैं। मार्केट कमेटी के कुछ कर्मचारी पैसे लेकर इन ट्रालियों की एंट्री करवाते हैं, जिससे यह पूरा खेल बेखौफ जारी है।
अधिकारियों का पक्ष भी आया सामने
मंडी सुपरवाइजर का कहना है कि उत्तर प्रदेश से आई दो ट्रॉलियों और एक जीप को रोका था। दो ड्राइवर मौके से फरार हो गए, जबकि एक ट्रॉली का प्राइवेट गेटपास काटा है और मामले की जांच की जा रही है। इस पूरी घटना की जानकारी के बाद स्थानीय किसानों में भारी रोष है. उनका कहना है कि अगर बाहरी राज्यों की गेहूं इस तरह मंडी में बेची जाती रही, तो उन्हें अपनी फसल का सही मूल्य मिलना मुश्किल हो जाएगा।
मंडी के सिस्टम पर उठ रहे सवाल
यह मामला सिर्फ अवैध खरीद-फरोख्त तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है। अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो यह साफ है कि बिना मिलीभगत के इतना बड़ा खेल संभव नहीं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या सख्त कदम उठाता है।
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